(रणभेरी): आगरा में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 38 वर्षीय युवक ने खुद ही एक लीटर की बोतल अपने मलाशय में डाल ली, जो अंदर फंस गई। बोतल फंसने के बाद युवक करीब 36 घंटे तक दर्द से तड़पता रहा और उसने खाना-पीना भी छोड़ दिया।
परिवार के लोगों ने जब उसे कमरे में दर्द से कराहते हुए देखा तो तुरंत पास के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने एक्स-रे जांच कराई तो मलद्वार के पास बोतल फंसी होने की पुष्टि हुई। इसके बाद युवक को इमरजेंसी में भर्ती कर ऑपरेशन की तैयारी की गई।
अस्पताल के सर्जनों की टीम ने सावधानी के साथ करीब एक घंटे से अधिक समय तक सर्जरी की। ऑपरेशन के दौरान खास ध्यान रखा गया कि बोतल निकालते समय मलाशय को कोई गंभीर नुकसान न पहुंचे। सफल सर्जरी के बाद बोतल को बाहर निकाल लिया गया और युवक की हालत स्थिर बताई गई। डॉक्टरों के अनुसार युवक को चार दिन तक अस्पताल में निगरानी में रखा गया। इस दौरान सिग्मोइडोस्कोपी के जरिए मलाशय की जांच भी की गई। घाव भरने के बाद और शौच संबंधी कोई दिक्कत न होने पर डॉक्टरों ने उसे छुट्टी दे दी।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में अक्सर व्यक्ति साइको-सेक्सुअल डिसऑर्डर (एनल एरोटिसिज्म) से प्रभावित होता है। इसमें कुछ लोगों को गुदा क्षेत्र में बाहरी वस्तु डालने से उत्तेजना या आनंद महसूस होता है। मनोचिकित्सकों के अनुसार यह एक तरह की मानसिक और व्यवहारिक समस्या हो सकती है। ऐसे मामलों में काउंसिलिंग और उपचार की जरूरत पड़ती है, क्योंकि इससे संक्रमण या यौन संचारित बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, जब किसी व्यक्ति को यौन व्यवहार या उत्तेजना पर नियंत्रण रखना मुश्किल हो जाए और वह इसके कारण अपनी सेहत, जिम्मेदारियों और दैनिक जीवन को नजरअंदाज करने लगे, तो इसे कम्पलसिव सेक्शुअल बिहेवियर या सेक्स एडिक्शन की श्रेणी में रखा जाता है।
