(रणभेरी): गाजियाबाद में प्रवासी मजदूरों, हॉस्टल में रहने वाले छात्र-छात्राओं और किरायेदारों के लिए राहतभरी खबर सामने आई है। पांच किलो वाले ‘छोटू’ एलपीजी सिलिंडर की खेप जिले की सभी 96 गैस एजेंसियों पर पहुंच चुकी है। आपूर्ति विभाग ने इन सिलिंडरों की बिक्री शुरू करने के निर्देश भी जारी कर दिए हैं।
जिले में डेढ़ लाख से अधिक छोटे-बड़े उद्योग संचालित हैं, जिनमें करीब 10 लाख कामगार कार्यरत हैं। इसके अलावा 50 से अधिक शिक्षण संस्थानों में एक लाख से ज्यादा छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय तनाव के चलते गैस आपूर्ति प्रभावित हुई, जिससे इन वर्गों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा और कई कामगारों को घर लौटना पड़ा।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने पांच किलो सिलिंडर की आपूर्ति बढ़ाई है। जिला पूर्ति अधिकारी अमित तिवारी के अनुसार, अब सभी एजेंसियों पर पर्याप्त मात्रा में ‘छोटू’ सिलिंडर उपलब्ध हैं। इसे लेने के लिए उपभोक्ताओं को आधार कार्ड की प्रति और निवास प्रमाण या स्वघोषणा पत्र देना होगा। आवेदन करते ही एजेंसी द्वारा सिलिंडर उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए 950 रुपये सुरक्षा राशि के साथ गैस का मूल्य अलग से देना होगा।
कालाबाजारी पर असर
छोटे सिलिंडरों की आसान उपलब्धता से एलपीजी की कालाबाजारी पर रोक लगने की उम्मीद है। पहले उपभोक्ताओं को लोकल सिलिंडर रिफिल के लिए 150 रुपये प्रति किलो तक खर्च करना पड़ता था, जबकि अब यह लागत करीब 100 रुपये प्रति किलो रहेगी। साथ ही यह अधिक सुरक्षित विकल्प भी है।
सर्वर ठप होने से हंगामा
बुधवार को इंडियन ऑयल की गैस एजेंसियों का सर्वर ठप हो जाने से भुगतान और डिलीवरी की प्रक्रिया प्रभावित हुई। एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग गईं और कई जगहों पर उपभोक्ताओं ने हंगामा किया। लोगों का आरोप था कि पहले दी गई पर्चियों के बावजूद उन्हें दोबारा प्रक्रिया से गुजरने को कहा गया। हालांकि दोपहर बाद सर्वर आंशिक रूप से चालू होने पर स्थिति सामान्य हुई।
पीएनजी कनेक्शन की मांग बढ़ी
गैस संकट के बीच पाइप्ड नैचुरल गैस (PNG) की मांग तेजी से बढ़ी है। जहां पहले हर महीने 1500–1800 कनेक्शन लिए जा रहे थे, वहीं मार्च में करीब 4000 नए उपभोक्ता जुड़े। वर्तमान में जिले में पीएनजी ग्राहकों की संख्या 3.55 लाख से अधिक हो चुकी है।
शिक्षण संस्थानों पर असर
संजयनगर स्थित एक तकनीकी संस्थान की मेस में गैस खत्म होने से करीब 200 छात्रों को परेशानी उठानी पड़ी। पिछले दो दिनों से वैकल्पिक व्यवस्था के तहत सीमित भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। मेस संचालक ने प्रशासन से मदद की मांग की है।
आपूर्ति व्यवस्था और नियम
जिले में करीब 12 लाख घरेलू और 1600 कॉमर्शियल गैस उपभोक्ता हैं। नियमों के अनुसार शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन के भीतर गैस आपूर्ति होनी चाहिए। वहीं बुकिंग के 36 से 48 घंटे के भीतर डिलीवरी का प्रावधान है। इससे अधिक देरी होने पर उपभोक्ता शिकायत दर्ज करा सकते हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे कालाबाजारी से बचें और सीधे अधिकृत गैस एजेंसियों से ही सिलिंडर प्राप्त करें।
