(रणभेरी): पूर्वांचल में पहली बार आयकर विभाग ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए बड़े पैमाने पर छापेमारी की। बृहस्पतिवार को करीब 200 अधिकारियों की टीम ने वाराणसी, सोनभद्र और मिर्जापुर में छह प्रमुख खनन कारोबारियों के ठिकानों पर एक साथ दबिश दी।
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली से आए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से खदान क्षेत्रों का ड्रोन के जरिए हवाई सर्वेक्षण कराया गया। ड्रोन मैपिंग से खनन स्थलों की वास्तविक स्थिति का आकलन किया गया। इसके बाद एआई आधारित सॉफ्टवेयर ने महज चार घंटे में बड़े पैमाने पर जुटाए गए डेटा का विश्लेषण कर विभाग को अवैध खनन और वास्तविक स्टॉक की सटीक जानकारी उपलब्ध कराई।
प्रारंभिक कार्रवाई में करीब 10 करोड़ रुपये की संपत्ति और नकदी जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। छानबीन के दौरान कई बेनामी बैंक खातों और संदिग्ध निवेश से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। विभाग ने तत्काल प्रभाव से 10 अहम बैंक खातों पर प्रोहिबिटरी ऑर्डर (पीओ) जारी कर लेन-देन पर रोक लगा दी है।
रसूखदारों पर भी नजर
अधिकारियों का कहना है कि जांच का दायरा सिर्फ कारोबारियों तक सीमित नहीं है। खनन विभाग से जुड़े कुछ प्रभावशाली अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है। डिजिटल साक्ष्यों और जब्त दस्तावेजों की गहन पड़ताल जारी है।
अभी बढ़ सकता है जब्ती का आंकड़ा
आयकर टीमों की कार्रवाई अभी जारी है। विभाग का अनुमान है कि दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड के विश्लेषण के बाद जब्ती का आंकड़ा और बढ़ सकता है। छापेमारी की खबर फैलते ही पूर्वांचल के खनन कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। अन्य जिलों के कारोबारियों ने भी अपने वित्तीय रिकॉर्ड दुरुस्त करने शुरू कर दिए हैं।आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के साथ हुई इस कार्रवाई को पूर्वांचल में कर चोरी और अवैध खनन के खिलाफ बड़ी पहल के तौर पर देखा जा रहा है।
