(रणभेरी): कानपुर में पुलिस ने देर रात एक बड़े अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का पर्दाफाश किया। जांच में सामने आया कि एक एमबीए छात्र की किडनी 10 लाख रुपये में खरीदी गई और मरीज को 60 लाख रुपये में बेच दी गई। तय रकम में छात्र को 50 हजार रुपये कम मिले, जिसके बाद उसने पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलने पर पुलिस ने सोमवार देर रात मेड लाइफ हॉस्पिटल, अहूजा हॉस्पिटल और प्रिया हॉस्पिटल में छापेमारी की। मेड लाइफ हॉस्पिटल में छात्र और मरीज दोनों भर्ती मिले, लेकिन अस्पताल वैध कागजात पेश करने में असफल रहा।
पुलिस ने मंगलवार को अहूजा हॉस्पिटल की मालकिन डॉ. प्रीति आहूजा, उनके पति डॉ. सुरजीत, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. राम प्रकाश, डॉ. नरेंद्र सिंह और दलाल शिवम अग्रवाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। प्रारंभिक जांच में अब तक 12 से अधिक अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के सबूत मिले हैं। जांच से पता चला कि यह नेटवर्क लखनऊ, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और नेपाल तक फैला हुआ था।

खुलासा कैसे हुआ
पुलिस के अनुसार, कल्याणपुर स्थित अहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट की गतिविधियां चल रही थीं। किडनी डोनर आयुष ने बताया कि वह मूलतः बिहार के समस्तीपुर का निवासी है और वर्तमान में मेरठ में रहता है।
आयुष ने बताया कि मास्टरमाइंड शिवम अग्रवाल उर्फ शिवम काड़ा ने उसे टेलीग्राम ग्रुप के जरिए फंसाया और कानपुर बुलाया। कल्याणपुर के आवास विकास-3 स्थित एक अपार्टमेंट में 10 लाख रुपये की डील तय हुई।
पुलिस के अनुसार, रविवार को अहूजा हॉस्पिटल में मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर का ट्रांसप्लांट किया गया, जिसके लिए परिवार से 60 लाख रुपये लिए गए। लेकिन आयुष को मात्र 9.50 लाख रुपये दिए गए, जिससे विवाद हुआ और उसने पुलिस को सूचित किया।

सूचना के मिलते ही अहूजा हॉस्पिटल ने आयुष को मेड लाइफ हॉस्पिटल में और पारुल तोमर को प्रिया हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया। हालांकि पुलिस ने दोनों तक पहुंच बनाई। इस दौरान आयुष की स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ने पर उसे हैलट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई
अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी (ACMO) डॉ. रमित रस्तोगी ने कहा कि कल्याणपुर के कुछ अस्पतालों में अवैध ट्रांसप्लांट की सूचना मिली थी। पुलिस, विजिलेंस और डॉक्टर्स की संयुक्त टीम ने छापेमारी की, जिसमें यह जानकारी सही पाई गई।
मेड लाइफ हॉस्पिटल, अहूजा हॉस्पिटल और प्रिया हॉस्पिटल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। कुल 10 सवाल पूछे गए हैं, जिनके जवाब मिलने के बाद तीनों अस्पतालों के लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
