काशी में नाव पर इफ्तार से मचा सियासी बवाल, 14 युवकों की गिरफ्तारी पर अखिलेश–इमरान ने उठाए सवाल

काशी में नाव पर इफ्तार से मचा सियासी बवाल, 14 युवकों की गिरफ्तारी पर अखिलेश–इमरान ने उठाए सवाल

वाराणसी (रणभेरी): वाराणसी में गंगा नदी के बीच नाव पर रोजा इफ्तार करने के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। पुलिस द्वारा 14 मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी के बाद इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने लखनऊ में एक इफ्तार कार्यक्रम में इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या गंगा में रोजा इफ्तार करना अपराध है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रशासन को कार्रवाई करने के बजाय युवकों को इफ्तारी देनी चाहिए थी। साथ ही उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि अक्सर “हथेली गरम होने पर पुलिस नरम हो जाती है”, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ।

कांग्रेस सांसद Imran Pratapgarhi ने भी इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यूपी पुलिस कानून का दुरुपयोग कर रही है और केवल शिकायत के आधार पर युवकों को गिरफ्तार करना जल्दबाजी भरा कदम है। वहीं भाजपा सांसद Dinesh Sharma ने कहा कि गंगा की धार्मिक और सांस्कृतिक पवित्रता का विशेष महत्व है। उनके अनुसार सनातन परंपरा में गंगा को मां का दर्जा दिया जाता है, इसलिए किसी भी ऐसे कार्य से बचना चाहिए जिससे उसकी पवित्रता प्रभावित हो।

काशी में नाव पर इफ्तार से मचा सियासी बवाल, 14 युवकों की गिरफ्तारी पर अखिलेश–इमरान ने उठाए सवाल

नाव पर हुई थी इफ्तार पार्टी

दरअसल सोमवार को Varanasi में गंगा नदी के बीच एक नाव पर कुछ युवकों ने इफ्तार पार्टी का आयोजन किया था। बताया जाता है कि रोजेदारों को फल-मेवे के साथ चिकन बिरयानी भी परोसी गई। इस आयोजन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद हिंदूवादी संगठनों ने आपत्ति जताई।

भारतीय जनता युवा मोर्चा के स्थानीय पदाधिकारी रजत जायसवाल की शिकायत पर कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। शिकायत मिलने के करीब आठ घंटे के भीतर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 14 युवकों को गिरफ्तार कर लिया।

मुस्लिम पक्ष से भी उठी आलोचना

इस मामले पर Anjuman Intazamia Masajid के संयुक्त सचिव एस.एम. यासीन ने भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि इफ्तार एक धार्मिक परंपरा है और इसे इस तरह पिकनिक या सैर की तरह आयोजित करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे कदमों से धर्म की छवि खराब होती है और विवाद की स्थिति बनती है।

इन धाराओं में दर्ज हुआ केस

वाराणसी पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है, जिनमें धार्मिक भावनाएं आहत करने, सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित करने और जल स्रोत को प्रदूषित करने से जुड़ी धाराएं शामिल हैं। इसके अलावा जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत भी प्रावधान लगाए गए हैं। फिलहाल यह मामला धार्मिक आस्था, कानून और राजनीति के बीच बहस का विषय बन गया है, जबकि पुलिस का कहना है कि जांच और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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