(रणभेरी): जिला जेल में निरुद्ध पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की मंगलवार देर रात अचानक तबीयत बिगड़ गई। सीने में तेज दर्द और बेचैनी की शिकायत के बाद जेल प्रशासन ने उन्हें तत्काल देवरिया मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। प्रारंभिक जांच में हालत गंभीर पाई जाने पर डॉक्टरों ने रात करीब दो बजे उन्हें गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
सूत्रों के मुताबिक, गोरखपुर में जांच के दौरान चिकित्सकों ने हार्ट अटैक की आशंका जताई है। फिलहाल उनका उपचार विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा है। मेडिकल कॉलेज के एक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अमिताभ ठाकुर पिछले नौ दिनों से हृदय की दवाएं नहीं ले रहे थे, जिससे उनकी स्थिति बिगड़ सकती है।
डॉक्टर के अनुसार उनकी ईसीजी रिपोर्ट काफी खराब आई है। इको जांच की तैयारी की जा रही है और ब्लड सैंपल परीक्षण के लिए भेजे गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्र, लखनऊ रेफर किया जा सकता है।
बताया गया कि मंगलवार को ही मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद से वह मानसिक रूप से परेशान थे। अमिताभ ठाकुर धोखाधड़ी के एक मामले में 10 दिसंबर से न्यायिक हिरासत में हैं।
जेल सूत्रों के अनुसार, मंगलवार दोपहर एक बजे पेशी के बाद उन्हें शाम तीन बजे वापस जेल लाया गया। रात साढ़े नौ बजे उन्होंने भोजन किया-दो रोटी और सब्जी। इसके बाद कुछ देर तक लिखते रहे। करीब रात 12 बजे अचानक उनके सीने में तेज दर्द हुआ और बेचैनी बढ़ गई। तत्काल जेल प्रशासन को सूचना दी गई और उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
“मुझे लगा कि कहीं एनकाउंटर न कर दें- ”पेशी के दौरान अदालत के बाहर अमिताभ ठाकुर ने अपनी गिरफ्तारी को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “मुकदमा दर्ज होने के अगले ही दिन मुझे रात दो बजे अचानक गिरफ्तार कर लिया गया। जिस तरह रात के सन्नाटे में मुझे उठाया गया, उससे मुझे लगा कि कहीं मेरा एनकाउंटर न कर दिया जाए। उस रात मैं वास्तव में बहुत घबरा गया था।”
उन्होंने आगे कहा कि उनके साथ चुनिंदा कार्रवाई की गई और केवल उन्हें ही निशाना बनाया गया। “जैसे ही मैंने धनंजय सिंह से जुड़े तथ्यों और आरोपों को सार्वजनिक किया, उसके बाद से ही मेरे खिलाफ साजिश रची जाने लगी। मैंने वाराणसी के कुछ बड़े भाजपा नेताओं के नाम भी सामने रखे थे, जिसके तुरंत बाद वाराणसी में मेरे ऊपर मुकदमा दर्ज कर दिया गया।”
