दबंग बिल्डरों ने निकाला अवैध निर्माण का नया तरीका, रविन्द्र पुरी में सीना ताने खड़े दर्जनों अवैध निर्माण
भ्रष्ट अफसरों के ठेंगे पर मुख्यमंत्री का जीरो टॉलरेंस, एच.ऍफ़.एल का जर्रा-जर्रा बेच रहा है वीडीए
फाइलों में कैद हो जाता है यहां मुख्यमंत्री का आदेश, जमीन पर बेलगाम हो गए है वीडीए के अफसर
वाराणसी (रणभेरी) : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहचान अवैध निर्माण पर कठोर कार्रवाई और जीरो टॉलरेंस की नीति के लिए बनी है। बुलडोजर की गूंज ने पूरे प्रदेश में एक संदेश दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं। लेकिन यदि इस नीति की वास्तविकता देखनी हो तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी आना पर्याप्त है। यहां मुख्यमंत्री के आदेश सुबह जारी होते हैं और शाम तक विकास प्राधिकरण के अफसरों की मेज पर दम तोड़ देते हैं।
वाराणसी विकास प्राधिकरण की देखरेख में शहर के सबसे संवेदनशील और प्रतिबंधित क्षेत्रों में अवैध निर्माण खुलेआम खड़े हो रहे हैं। भेलूपुर जोन अंतर्गत एचएफएल और रवींद्रपुरी जैसे इलाकों में जहां किसी भी प्रकार का नया निर्माण प्रतिबंधित है वहां आज एक के बाद एक विशालकाय व्यावसायिक इमारतें खड़ी दिखाई दे रही हैं। यह निर्माण किसी चोरी छिपे अंधेरे में नहीं बल्कि दिनदहाड़े विकास प्राधिकरण के अफसरों की नाक के नीचे हो रहे हैं।

रवींद्रपुरी ऐसा क्षेत्र है जहां भवन निर्माण पर स्पष्ट रोक है। इसके बावजूद लगभग एक दर्जन से अधिक बड़े अवैध व्यावसायिक भवन खड़े हो चुके हैं और निर्माण का सिलसिला अब भी जारी है। सवाल यह नहीं है कि अवैध निर्माण हो रहे हैं बल्कि सवाल यह है कि इन्हें संरक्षण कौन दे रहा है।
टीन की अस्थायी दीवारों के पीछे अवैध इमारतों का निर्माण
अवैध निर्माण का एक नया और सुनियोजित तरीका अपनाया जा रहा है। जिस भूखंड पर निर्माण करना होता है उसके चारों ओर पहले टीन शेड आड़ बनाया जाता है। बाहर से देखने पर यह सिर्फ दीवारों का घेरा दिखता है। अंदर दिन रात निर्माण चलता रहता है। जब भवन लगभग तैयार हो जाता है तब अचानक टीन शेड की दीवार हटा दी जाती हैं और सामने एक पूरी तैयार इमारत खड़ी मिलती है। सूत्रों का कहना है कि यह तरीका खुद विकास प्राधिकरण के अफसरों की सलाह पर अपनाया जा रहा है ताकि निरीक्षण और कार्रवाई से बचा जा सके।
ईमानदार उपाध्यक्ष और बेलगाम अधीनस्थ
यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की छवि एक ईमानदार और सख्त अधिकारी के रूप में जानी जाती है। सवाल यह है कि उनकी कुर्सी के नीचे बैठे अफसर किसके इशारे पर कानून को कुचल रहे हैं। क्या उपाध्यक्ष को इन अवैध निर्माणों की जानकारी नहीं है या फिर जानकारी होने के बावजूद आंखें मूंद ली गई हैं।यदि जानकारी नहीं है तो यह घोर प्रशासनिक विफलता है और यदि जानकारी है तो यह सीधी मिलीभगत का मामला बनता है। दोनों ही स्थितियां सरकार की साख पर गहरा आघात करती हैं।

मुख्यमंत्री के दावे पर सीधा सवाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अवैध निर्माण के खिलाफ कड़ा रुख अपनाकर प्रदेश में एक उदाहरण स्थापित किया है। लेकिन वाराणसी में जो हो रहा है वह उनके दावों को खोखला साबित करता है। जब प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में विकास प्राधिकरण के अफसर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं तो प्रदेश के बाकी हिस्सों में क्या स्थिति होगी इसका अंदाजा लगाना कठिन नहीं है।

कानून क्या कहता है
उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम के तहत बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण अपराध है। भवन स्वामी के साथ साथ ठेकेदार और निर्माण में शामिल इंजीनियर भी दोषी माने जाते हैं। ऐसे मामलों में निर्माण को सील करने, ध्वस्तीकरण, भारी जुर्माना और अभियोजन तक का प्रावधान है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि यदि अवैध निर्माण किसी अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत से हुआ है तो उस अधिकारी पर भी विभागीय कार्रवाई, निलंबन और आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। नियम स्पष्ट हैं लेकिन उनका पालन कराने वाला तंत्र ही संदिग्ध नजर आ रहा है।

विकास प्राधिकरण की जिम्मेदारी
शहर में हर एक निर्माण की निगरानी वाराणसी विकास प्राधिकरण की जिम्मेदारी है। क्षेत्रीय जेई से लेकर उच्च अधिकारियों तक की जवाबदेही तय है। इसके बावजूद प्रतिबंधित क्षेत्रों में बहुमंजिला व्यावसायिक इमारतें खड़ी हो जाना यह साबित करता है कि या तो अधिकारी अपने कर्तव्य से भाग रहे हैं या फिर अवैध कमाई के लालच में कानून को बेच दिया गया है।
अब निगाहें सरकार पर
यह मामला केवल अवैध निर्माण का नहीं बल्कि शासन व्यवस्था की विश्वसनीयता का है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने यह सीधी चुनौती है कि वे अपने ही अधीनस्थ विभागों को कैसे नियंत्रित करते हैं। क्या वाराणसी विकास प्राधिकरण के जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई होगी या फिर रवींद्रपुरी जैसे प्रतिबंधित क्षेत्रों में अवैध इमारतें यूं ही खड़ी होती रहेंगी।
वाराणसी की जनता अब सिर्फ बयान नहीं कार्रवाई देखना चाहती है। क्योंकि जब कानून खुद अवैध निर्माण की नींव में दब जाए तो शहर नहीं बल्कि व्यवस्था ढहने लगती है।
