सड़कों पर थमी जिंदगी की रफ्तार, पांडेय हवेली से शिवाला तक 11 बजे के बाद रेंगते वाहन
हर रोज बन रही विकट स्थिति, एम्बुलेंस और स्कूल बसें भी फंसीं, व्यापार पर पड़ा सीधा असर
अव्यवस्थित पार्किंग और ई-रिक्शा का दबाव, प्रशासनिक दावे बेअसर
स्थायी ट्रैफिक प्लान के अभाव में जनता त्रस्त, तमाम प्रशासनिक कोशिशों के बावजूद भी नहीं मिल रहा स्थाई समाधान
वाराणसी (रणभेरी) : काशी की सड़कों पर इन दिनों जाम एक स्थायी ‘चक्रव्यूह’ का रूप ले चुका है। सुबह 11 बजते-बजते शहर की रफ्तार ऐसी थम जाती है मानो किसी ने समय की सुइयों को जकड़ लिया हो। पांडेय हवेली से लेकर सोनारपुरा और शिवाला तक का इलाका हर दिन एक अभेद्य किले में तब्दील हो जाता है, जहां प्रवेश तो संभव है, लेकिन निकास मुश्किल। कामकाजी लोगों के लिए यह सफर अब रोज की परीक्षा बन चुका है।
दिन चढ़ते ही वाहनों की लंबी कतारें सोनारपुरा चौराहे से शिवाला तक दिखाई देती हैं। कुछ सौ मीटर की दूरी तय करने में 30 से 45 मिनट तक का समय लग रहा है। सड़कें पहले से ही संकरी हैं, ऊपर से बेतरतीब खड़े दोपहिया और चारपहिया वाहन हालात को और बिगाड़ रहे हैं। ई-रिक्शा और ऑटो की बढ़ती संख्या ने यातायात का संतुलन पूरी तरह बिगाड़ दिया है। कई बार दो वाहन आमने-सामने फंस जाते हैं और पीछे की पूरी लाइन जाम में तब्दील हो जाती है।
सबसे चिंताजनक स्थिति तब दिखती है जब एम्बुलेंस सायरन बजाती हुई जाम में फंसी रहती है। मरीजों को लेकर जा रही एम्बुलेंस को रास्ता देने की जगह ही नहीं बचती। स्कूल बसों में बैठे बच्चे भी इस जाम के शिकार बन रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि रोज देर से घर पहुंचने के कारण बच्चों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है।
दुकानदारों का दर्द भी कम नहीं है। सोनारपुरा और शिवाला क्षेत्र के व्यापारियों के अनुसार सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक का समय उनके कारोबार के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है, लेकिन इसी समय सड़क पर इतनी भीड़ रहती है कि ग्राहक दुकानों तक पहुंच ही नहीं पाते। कई ग्राहकों को जाम देखकर बीच रास्ते से ही लौटना पड़ता है। व्यापारियों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो बाजार की साख पर भी असर पड़ेगा। स्थानीय लोगों के मुताबिक प्रशासन की ओर से समय-समय पर ट्रैफिक सुधार के दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आता। न तो पार्किंग की स्पष्ट व्यवस्था है और न ही ट्रैफिक पुलिस की पर्याप्त तैनाती। कई स्थानों पर ट्रैफिक कर्मी दिखाई भी देते हैं तो वे भी जाम के दबाव के आगे बेबस नजर आते हैं।
यातायात विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में एकतरफा यातायात व्यवस्था, सख्त नो-पार्किंग जोन और ई-रिक्शा संचालन के लिए तय रूट निर्धारित किए बिना स्थिति सुधरना मुश्किल है। इसके साथ ही फुटपाथ अतिक्रमण हटाने और वैकल्पिक मार्गों को सक्रिय करने की आवश्यकता है।
काशी की पहचान उसकी सांस्कृतिक धड़कन और जीवंत गलियों से है, लेकिन जब यही गलियां जाम की जकड़न में सिसकने लगें तो सवाल उठना स्वाभाविक है। यदि समय रहते पांडेय हवेली, सोनारपुरा और शिवाला जैसे प्रमुख मार्गों के लिए स्थायी ट्रैफिक प्लान लागू नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में हालात और विकराल हो सकते हैं। फिलहाल, शहरवासी हर दिन इसी चक्रव्यूह को भेदने की जद्दोजहद में अपनी ऊर्जा और समय गंवा रहे हैं।
