राधेश्याम कमल
वाराणसी (रणभेरी)। अड़भंगी बाबा भोलेनाथ की नगरी काशी की हर चीज अनूठी और निराली है। जिस तरह की होली काशी में मनायी जाती है शायद वैसी होली देश में कहीं भी नहीं मनायी जाती है। इसमें चिता भस्म की होली काफी विख्यात है। अंतिम संस्कार के लिए महाश्मशान पर लाए गये पार्थिव शरीर को चिता में सुपुर्द करने के बाद उसकी भस्म (राख) से यह होली खेली जाती है। बनारस के लोग इसे मसाने की होली के नाम से जानते हैं।
महाश्मशान में पिछले ढाई दशकों से मसाने की होली चल रही है। मसाने की होली की शुरुआत 1999 में मणिकर्णिकाघाट पर गुलशन कपूर ने अपने सहयोगियों के साथ की थी। आज मसाने की होली को देखने के लिए देश के कोने-कोने से लोग महाश्मशान घाट पर पहुंचते हैं। रंगभरी एकादशी के दूसरे दिन महाश्मशान पर मसाने वाली होली खेली जाती है।

महाश्मशान पर एक ओर जहां चिताएं जलती रहती हैं वहीं दूसरी ओर काशी ही नहीं बाहर से आये लोग चिता भस्म की होली खेलते हैं। काशी में रंगभरी एकादशी के दूसरे दिन महाश्मशान मणिकर्णिकाघाट पर चिता भस्म की होली खेली जाती है। इस बार मसाने की होली 28 फरवरी को खेली जायेगी।

महाश्मशन नाथ मंदिर के अध्यक्ष चैनू प्रसाद गुप्ता एवं व्यवस्थापक गुलशन कपूर बताते हैं कि यह प्राचीन परम्परा 28 फरवरी को दोपहर 12 बजे बाबा महाश्मशान नाथ और मां काली को चिता भस्म और गुलाल अर्पित कर शुरू होगी। मध्याह्न आरती कर बाबा को भांग, फल मिठाई आदि का भोग लगाया जायेगा। इसके बाद चिता भस्म की होली की शुरुआत होगी। मसाने की होली में डमरुओं की निनाद पर 500 से ज्यादा साधु, नागा साधु, नरमुंडों की माला पहने अघोरी बाबा मसाननाथ के साथ चिता भस्म की होली खेलेंगे।
पं. छन्नूलाल मिश्र ने खेले मसाने में होली दिगम्बर गाकर किया था चर्चित
मसाने वाली होली को लेकर बनारस घराने के प्रख्यात कलाकार पद्मविभूषण स्व. पं. छन्नू लाल मिश्र ने खेले मसाने में होली दिगम्बर, खेले मसाने में होली गाकर इसे काफी ख्याति दिलायी थी। पं. छन्नू लाल मिश्र को भी इस होली गीत से काफी प्रसिद्धि मिली थी। होली के किसी भी कार्यक्रम में पं. छन्नू लाल मिश्र को लोगों की फरमाइश पर इस गाने को सुनाना पड़ता था। बाद में इसी गीत को पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने दूसरे अंदाज में गाया।
जो युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय भी हुआ। होली के हर कार्यक्रमों में लोग इस गीत को सुनना पसंद करते थे। पं. छन्नू लाल मिश्र तो अब इस दुनिया में नहीं रहे लेकिन जब वह जीवित रहे तो उनसे इस होली गीत के बारे में जब पूछा गया था तो उन्होंने जवाब दिया था कि किसी ने यह गीत हमें लिख कर दिया था और हमने उसे गा दिया। हमें क्या पता था कि यह गीत इतना मशहूर हो जायेगा।
मसाने की होली की ख्याति बढ़ती ही गई : गुलशन कपूर
मसाने वाली होली के आयोजक गुलशन कपूर बताते हैं कि मणिकर्णिकाघाट पर रंगभरी एकादशी के दूसरे दिन चिता भस्म की होली खेली जाती है। इसमें शरीक होने के लिए काशी ही नहीं बल्कि देश भर से लोग यहां आते हैं। मसाने की होली की शुरुआत 1999 में हुई थी।

पहले यह आयोजन बाबा मसान के मणिकर्णिका स्थित मंदिर पर हुआ करता था। हर कोई मंदिर के अंदर परम्परागत ढंग से इसका निर्वाह करते थे। बाद में इसको आम जनमानस से जोड़ दिया गया। जब इसकी शुरुआत हुई तो काशीवासी व अन्य लोग भी इससे जुड़ गये। इसके साथ ही महाश्मशान पर इसकी ख्याति बढ़ती गई। इस दिन मध्याह्न में महाश्मशान बाबा का स्नान कराने के बाद उनकी आरती की जाती है।
इसके बाद मध्याह्न में ही मसाने वाली होली की शुरुआत हो जाती है। इसे आदि से अनंत तक की यात्रा का पर्व भी कहते हैं। यहां पर बढ़ती हुई भीड़ को देख कर लोगों को रास नहीं आ रहा है। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव अपने गणों के साथ महाश्मशान पर चिता भस्म की होली खेलने आते हैं। इसी परम्परा का हम निर्वहन कर रहे हैं। इस साल भी हम मसाने वाली होली परम्पराढंग से मनायेंगे।
