गैस किल्लत के शोर में बनारस में शुरू हुआ ब्लैक का खेल

गैस किल्लत के शोर में बनारस में शुरू हुआ ब्लैक का खेल
  • वाराणसी में ट्रॉली मैन-दुकानदारों की जमाखोरी से रसोई और कारोबार बेहाल
  • घरेलू सिलेंडर 1400 और कमर्शियल 3000 रुपये में बेच रहे ट्रॉली मैन, जिम्मेदारों के दावे की उड़ा रहे धज्जियां
  • लोगों ने कहा – बुकिंग के बाद भी समय से नहीं मिल रही डिलीवरी, एजेंसियों के काट रहे चक्कर
  • शादियों के सीजन में हलवाई मजबूर, गैस के बजाय लकड़ी-कोयले पर बन रहा खाना
  • सख्ती के दावों के बीच खुल्लमखुल्ला ब्लैक मार्केटिंग, ट्रॉली मैन से लेकर दुकानदार तक शामिल

वाराणसी (रणभेरी): पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित होने का असर अब सीधे बनारस की रसोइयों और कारोबार पर दिखाई देने लगा है। शहर में एलपीजी सिलिंडरों की भारी किल्लत के शोर के बीच अब जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग का खुला खेल शुरू हो गया है। हालात यह हैं कि ट्रॉली मैन से लेकर छोटे दुकानदार तक इस संकट को मुनाफे के मौके में बदलते नजर आ रहे हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग केवल कागजी सख्ती के दावे कर रहा है।

शहर में घरेलू गैस सिलिंडर जहां 1400 रुपये तक और व्यावसायिक सिलिंडर 3000 रुपये तक में ब्लैक में बेचे जा रहे हैं। आमतौर पर जो सिलिंडर निर्धारित दर पर उपलब्ध होना चाहिए, वही अब चोरी-छिपे ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई ट्रॉली मैन गैस एजेंसियों से सिलिंडर उठाने के बाद सीधे जरूरतमंद ग्राहकों को ब्लैक में बेच देते हैं। इसके बाद एजेंसी रिकॉर्ड में डिलीवरी दिखाकर औपचारिकता पूरी कर दी जाती है।

जिले में लगभग आठ लाख गैस उपभोक्ता हैं, जिनमें से करीब एक लाख लोग इस समय सीधे गैस किल्लत से जूझ रहे हैं। बुकिंग कराने के बाद भी कई दिनों तक सिलिंडर की डिलीवरी नहीं मिल रही है। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं और कई जगह उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिल रही है। इस संकट के अफवाह का सबसे बड़ा असर शादियों के सीजन पर पड़ा है।

इन दिनों शहर और आसपास के क्षेत्रों में रोज सैकड़ों शादियां हो रही हैं, लेकिन कैटरर्स और हलवाइयों को व्यावसायिक गैस सिलिंडर नहीं मिल पा रहे हैं। एक शादी में जहां आम तौर पर दस तक सिलिंडरों की जरूरत पड़ती है, वहीं अब मुश्किल से दो-तीन सिलिंडर ही मिल पा रहे हैं। मजबूरन हलवाई पुराने तरीके से लकड़ी और कोयले के चूल्हों पर खाना बनाने को विवश हो गए हैं। कई जगह बरातियों का भोजन धुएं से भरे पारंपरिक चूल्हों पर पक रहा है।

गैस की किल्लत का असर केवल घरों और शादियों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय उद्योग भी इससे बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। इंडस्ट्रियल एस्टेट चांदपुर स्थित कॉरुगेटेड बॉक्स उद्योग से जुड़े उद्यमियों का कहना है कि व्यावसायिक गैस की आपूर्ति ठप होने से करीब 50 औद्योगिक इकाइयों का उत्पादन रुक गया है। पूर्वांचल के साथ-साथ बिहार और झारखंड तक बॉक्स सप्लाई करने वाला यह उद्योग अब भारी नुकसान की आशंका से जूझ रहा है।

इस बीच शहर में नियमों की भी खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। व्यावसायिक सिलिंडर न मिलने के कारण कई होटल, ढाबे और रेहड़ी-पटरी वाले दुकानदार घरेलू गैस सिलिंडर का अवैध उपयोग कर रहे हैं। हालांकि प्रशासन समय-समय पर सख्ती के दावे करता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ब्लैक मार्केटिंग का खेल बिना किसी डर के जारी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग पर सख्त कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। फिलहाल बनारस में गैस किल्लत ने आम आदमी की रसोई से लेकर उद्योग और शादियों तक हर क्षेत्र को संकट में डाल दिया है। सवाल यह है कि जिम्मेदार विभाग इस खुले खेल पर कब तक आंखें मूंदे रहेगा, या फिर बनारस के लोग इसी तरह महंगी गैस खरीदने को मजबूर होंगे।

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