सुप्रसिद्ध शास्त्री गायक पंडित राजन मिश्र की अस्थियां गंगा में हुई विसर्जित

सुप्रसिद्ध शास्त्री गायक पंडित राजन मिश्र की अस्थियां गंगा में हुई विसर्जित

वाराणसी (रणभेरी): सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पद्मभूषण स्व. पंडित राजन मिश्र की अस्थि कलश उनके पैतृक आवास कबीरचौरा पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा जिसके बाद शुक्रवार की सुबह वाराणसी में गंगा में विसर्जित कर दी गईं। फूल मालाओं से सजे अस्थि कलश को उनके बेटे और परिवार के अन्य लोग लेकर गंगा घाट पहुंचे। इस दौरान लोग पंडित मिश्र का मशहूर गीत धन्य भाग्य  सेवा का अवसर पाया गाते रहे।  अस्सी घाट के ठीक सामने बजड़े से बीच धारा में पहुंच कर अस्थियां गंगा को समर्पित की गईं।

बीते 25 अप्रैल को पंडित राजन मिश्रा का दिल्ली में कोरोना संक्रमण के बाद आये हार्ट अटैक से देहांत हो गया था। पंडित राजन मिश्रा अपने 400 साल पुराने पारम्परिक संगीत परम्परा को अपने छींटे भाई साजन मिश्रा के साथ आगे बढ़ाया था। साल 1978 में श्रीलंका में किये गए स्टेज प्रोग्राम के बाद कभी इन बहियों की जोड़ी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

पंडित राजन मिश्रा की पोती शियाशी मिश्रा ने बताया कि दिल्ली से अस्थि कलश लेकर दिल्ली से उनके उनके छोटे भाई ख्यात शास्त्रीय गायक पद्मभूषण पंडित साजन मिश्रा जी और छोटे पुत्र रजनीश मिश्रा लेकर कबीरचौरा स्थित पैतृक आवास पर आए। कि पंडित राजन मिश्र का 25 अप्रैल को नई दिल्ली में कोरोना संक्रमण के कारण एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया था। वहां ही उनकी अंत्येष्टि की गई थी। उनके निधन से बनारस के संगीत रसिक सदमे में तो थे ही उनके अंतिम दर्शन व अंतिम यात्रा में शामिल न हो पाने का भी दुख था। 400 साल की पारिवारिक परम्परा को आगे बढ़ाते हुए राजन और साजन मिश्रा को संगीत जगत में बहुत ही सम्मान से देखा जाता है। बनारस घराने में जन्मे पंडित राजन और पंडित साजन मिश्रा को संगीत की शिक्षा उनके दादा पंडित बड़े राम जी मिश्रा और पिता पंडित हनुमान मिश्रा ने दी थी।