ईद के इंतजार से पहले टूट गया कारोबार

ईद के इंतजार से पहले टूट गया कारोबार
  • कपड़े और जूते की दुकानें बंद होने से व्यापारियों के सामने बढ़ा संकट 
  • दुकानदार बोले, अगर उनके सामने खड़ा हो रहा जीविकोपार्जन का संकट

वाराणसी (रणभेरी): खुशियों का त्योहार ईद करीब आ रहा है। मुस्लिम समुदाय पर्व को मनाने की तैयारियों में जोर-शोर से जुट गया है। लॉकडाउन से पहले तमाम लोगों ने कपड़े, जूते समेत तमाम जरूरी चीजों की खरीदारी कर ली थी, लेकिन बड़ी संख्या ऐसे लोगों की रही, जिन्होंने बाजार का रुख ही नहीं किया। उनकी सोच थी कि जब ईद करीब आएगी, तब वे खरीदारी करेंगे, लेकिन उनके इंतजार पर कोरोना कर्फ्यू भारी पड़ गया। मई के पहले हफ्ते से लॉकडाउन (कोरोना कर्फ्यू) शुरू हो गया। पहले शनिवार व रविवार और फिर सोमवार को कोरोना कर्फ्यू लगाया गया। इसके बाद यह दिन-प्रतिदिन बढ़ता गया। अब 10 मई (सोमवार) तक लॉकडाउन बढ़ने और कोरोना संक्रमण में फिलहाल कमी नहीं आने की वजह से ईद से पहले बाजार खुलने के आसार बहुत कम हैं। ऐसे में ईद की खरीदारी पर पूरी ग्रहण लगने की आशंका है। 

दरअसल, ईद के मद्देनजर कारोबारियों ने पहले से माल मंगाकर रखा था। वह अब ग्राहकों की बाट जोह रहा है। दुकानें बंद होने की वजह से कपड़ा, जूता, सौन्दर्य प्रसाधन, इत्र, सेवर्इं, नमकीन बेचने वाले दुकानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें हैं। उनका कहना है कि अगर ईद तक दुकानें नहीं खुलीं तो धंधा चौपट हो जाएगा। ऐसे में उनके सामने जीविकोपार्जन का संकट खड़ा हो जाएगा। सरकार को इसपर भी ध्यान देना चाहिए। 

कोरोना के प्रकोप से फीकी पड़ी ईद की रंगत

ईद के मौके पर बढ़ चढ़कर खरीदारी होती है जिसमें न सिर्फ कपड़े बल्कि जूते-चप्पल, खानपान, सौंदर्य से जुड़ी सभी वस्तुओं का लें दें जोरो पर होता है। लिहाजा  प्लीज के मौके पर बाजार में भी काफी तेजी आ जाती है। इसी आस में सभी व्यापारियों ने कमर कस ली थी ताकि इस त्यौहार के मौके पर जमकर खरीदारी होगी जिससे बाजार में उछाल आएगा और सब की आर्थिक स्थिति बेहतर हो जाएगी, लेकिन कोरोना के चलते एक बार फिर सबकी उम्मीदों पर पानी फिर गया। लॉक डाउन के चलते हैं सब कुछ वही का वही थप्पड़ गया है। इसके मद्देनजर सभी व्यापारियों ने जमकर स्टॉक भर लिया था। लेकिन ईद के करीब आते-आते कोरोना के मामलों में दस गुना इजाफा हो गया। जिसके चलते अचानक कर्फ्यू का फैसला लिया गया। 

छलक उठा व्यापारियों का दर्द

ऐसे में बाजार में उतार का यह सपना सपना बनकर ही रह गया ना तो लोग बाहर खरीदारी के लिए निकल पा रहे हैं और ना ही व्यापारियों को दुकानें खोलने की अनुमति है ऐसे में बहुत बड़ा तक का आर्थिक समस्या सिर्फ टूटने की कगार पर आ खड़ा हुआ है। आपके अपने अखबार ‘गूंज उठी रणभेरी’ ने कपड़ा और जूते-चप्पल के कारोबार पर कोरोना के प्रभाव की पड़ताल की तो व्यापारियों का दर्द छलक उठा।

व्यवसायियों की कहानी, उनकी जुबानी

ईद के मद्देनजर कहां पर स्टॉक भर दिया गया था। अब समझ नहीं आता क्या किया जाए। कहने को तो सरकार कह रही है कि हम जीवन और जीविका हम दोनों बचा रहे हैं, लेकिन जीविका तो छीन ली गई। ऐसे में बाजार को बहुत नुकसान हो रहा है। सरकार से मेरी यही अपील है कि कुछ घंटों के लिए बाजार खोलकर खरीदारी करने की अनुमति दी जाए ताकि दो खरीदारी कर सके और व्यवसाय नुकसान से बच सकें।------शरद अरोड़ा

कुछ कहा नहीं जाता जा सकता है। क्योंकि यह महामारी भी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में जान है तो जहान है हम सरकार के फैसले के साथ हैं, लेकिन साथ ही हमे यह भी देखना चाहिए कि हम व्यापारियों को काफी नुकसान हुआ है। क्योंकि यही एक मौका है जब हमारे कपड़ों के उद्योग में काफी व्यवसाय होता है, लेकिन इस लॉक डाउन के चलते सब ठप पड़ गया है। पूरा सीजन खाली चला गया है। अब बाजार खोलने का कोई मतलब भी नहीं है । यह बाजार के लिए बहुत बड़ा नुकसान है। इसकी भरपाई कैसे होगी, यह यक्ष प्रश्न है। ----   अजय यादव

लॉकडाउन के चलते पूरा बाजार ध्वस्त हो गया है और जब तक बाजार खुलेंगे, तब तक लगन और ईद दोनों के मद्देनजर सीजन खत्म हो जाएगा। इसलिए अब बाजार खुलने की कोई उम्मीद नहीं है। इन हालातो में व्यापारी वर्ग फिर से घुटनों पर आता नजर आ रहा है। उसके साथ ही महामारी के चलते हुए लॉक डाउन के फैसले का समर्थन करना ही होगा। सरकार से बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं की जा सकती हैं।----  मोनू 

लॉकडाउन की वजह से कारोबार टूट गया है। अब राहत के आसार नहीं नजर आ रहे हैं। त्योहार को देखते हुए कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए दुकानों को कुछ देर तक खोलने की छूट देनी चाहिए। सरकार को व्यापारियों की समस्या पर ध्यान देना चाहिए। अन्यथा व्यापारी भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएंगे। ----सुरेश यादव