जलशक्ति मंत्री को बंधक बनाने के मामले में BJP विधायक को नोटिस, 7 दिन में जवाब तलब

जलशक्ति मंत्री को बंधक बनाने के मामले में BJP विधायक को नोटिस, 7 दिन में जवाब तलब

(रणभेरी): उत्तर प्रदेश की राजनीति में असहजता पैदा करने वाले एक घटनाक्रम पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने सख्त रुख अपनाया है। जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को कथित रूप से रोककर रखने के मामले में चरखारी से भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने विधायक से सात दिनों के भीतर लिखित जवाब मांगा है।

घटना 30 जनवरी की बताई जा रही है। मंत्री स्वतंत्र देव सिंह महोबा में एक सरकारी कार्यक्रम में शिरकत के बाद लौट रहे थे, तभी चरखारी क्षेत्र में उन्हें रोके जाने की सूचना सामने आई। इस घटनाक्रम ने पार्टी संगठन को असहज स्थिति में ला खड़ा किया, जिसके बाद प्रदेश नेतृत्व ने मामले को संज्ञान में लिया।

इस प्रकरण के बाद विधायक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें वे यह कहते सुने गए कि आवश्यकता पड़ी तो वे मुख्यमंत्री को भी रोक सकते हैं। वीडियो में उन्होंने दावा किया कि यह कदम किसी व्यक्तिगत स्वार्थ से नहीं, बल्कि जनता और विकास से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए उठाया गया है।

जलशक्ति मंत्री को बंधक बनाने के मामले में BJP विधायक को नोटिस, 7 दिन में जवाब तलब

वायरल बयान में विधायक यह भी कहते नजर आए कि अपनी बात सड़क पर रखने में उन्हें कोई संकोच नहीं है और यदि जनप्रतिनिधि खुले मंच पर सवाल उठाता है तो आपत्ति क्यों होनी चाहिए। उन्होंने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि वे किसी ठेके, पट्टे या पदोन्नति की मांग नहीं कर रहे, बल्कि क्षेत्र की समस्याओं को सामने ला रहे हैं।

जलशक्ति मंत्री को बंधक बनाने के मामले में BJP विधायक को नोटिस, 7 दिन में जवाब तलब

इसके साथ ही विधायक ने पुराने राजनीतिक संदर्भों का जिक्र करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौर में काम न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध किए जाते थे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि विधायक बनने से पहले वे बुंदेलखंड क्षेत्र से जुड़े सामाजिक आंदोलन में सक्रिय थे और भाजपा में आने के बाद पार्टी अनुशासन का पालन कर रहे हैं।

फिलहाल, पार्टी नेतृत्व ने पूरे मामले पर विधायक से औपचारिक स्पष्टीकरण मांगा है। सात दिनों में जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को संगठनात्मक अनुशासन और सार्वजनिक आचरण से जोड़कर देखा जा रहा है।

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