(रणभेरी): शनिवार को राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में उत्तर प्रदेश समेत देश के कई राज्यों के हजारों शिक्षक एकत्रित हुए और टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) की अनिवार्यता के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। इस मौके पर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक समेत 20 राज्यों के लाखों शिक्षक शामिल हुए।
शिक्षकों ने “टीईटी हटाओ, शिक्षक बचाओ” और “हमारा हक छीनने नहीं देंगे” जैसे नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंचकर पीएम मोदी के नाम ज्ञापन सौंपा, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के फैसले के खिलाफ अध्यादेश लाने और संसद में कानून बनाकर शिक्षकों को TET अनिवार्यता से छूट देने की मांग की गई।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जताई नाराजगी
टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय लाखों शिक्षक परिवारों के लिए बेरोजगारी का कारण बन सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार जल्द हस्तक्षेप नहीं करती है, तो संसद का घेराव किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और संकट
सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2025 में जूनियर हाईस्कूल तक के सभी शिक्षकों के लिए TET पास करने को अनिवार्य कर दिया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 1.87 लाख शिक्षकों की नौकरी पर संकट उत्पन्न हो गया।
शिक्षकों की दो प्रमुख मांगें हैं:
- 1 सितंबर 2027 तक टीईटी पास नहीं करने वाले शिक्षकों को नौकरी से न निकाला जाए और उन्हें सेवानिवृत्त मानते हुए पेंशन व अन्य लाभ मिले।
- 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET अनिवार्यता से पूरी तरह छूट दी जाए।
देशभर के 20 लाख शिक्षक खतरे में
डॉ. शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से देशभर में 20 लाख से अधिक शिक्षकों की नौकरी असुरक्षित हो गई है। उन्होंने केंद्र सरकार से कानून बनाकर राहत देने की मांग की।
यूपी के शिक्षक और इतिहास
उत्तर प्रदेश के प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री संजय सिंह ने बताया कि प्रदेश में TET 27 जुलाई 2011 से लागू हुआ। इससे पहले नियुक्त लगभग 1.87 लाख शिक्षक अब इस परीक्षा के दायरे में आ गए हैं।

प्रदर्शन का मारक असर
हमीरपुर के 52 वर्षीय शिक्षक गणेशीलाल और महोबा के 49 वर्षीय मनोज कुमार की मौत से यह मुद्दा और गंभीर हो गया। परिवारों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षक मानसिक तनाव में थे।
सुप्रीम कोर्ट का विवरण
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु और महाराष्ट्र की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए फैसला दिया कि जिन शिक्षकों की नौकरी में पांच साल से अधिक समय बाकी है, उन्हें TET पास करना अनिवार्य होगा। नहीं करने पर उन्हें इस्तीफा देना या अनिवार्य सेवानिवृत्ति लेना पड़ेगा।
UP में नौकरी संकट का दायरा
RTE Act (2009) और NCTE की अधिसूचना (29 जुलाई 2011) के तहत कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य है। प्रदेश में इससे पहले नियुक्त लगभग 1.86 लाख शिक्षक TET पास नहीं हैं। इनमें 50 हजार शिक्षक तो UP TET में बैठने के पात्र भी नहीं हैं।
यूपी TET परीक्षा की तैयारी
उत्तर प्रदेश TET 2026 परीक्षा 2, 3 और 4 जुलाई को आयोजित होगी। आवेदन प्रक्रिया 27 मार्च से शुरू हो चुकी है और फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 26 अप्रैल है। इस बार आवेदन शुल्क में वृद्धि की गई है। फॉर्म सुधार और शुल्क संबंधी समस्याओं के समाधान की अंतिम तारीख 1 मई तय की गई है। यूपी में टीईटी परीक्षा करीब चार साल बाद हो रही है। पिछली बार नवंबर 2021 में पेपर लीक होने के कारण परीक्षा रद्द कर दी गई थी।
