पेट्रोल-डीजल में 10 रुपये प्रति लीटर की राहत, सरकार ने एक्साइज घटाया

पेट्रोल-डीजल में 10 रुपये प्रति लीटर की राहत, सरकार ने एक्साइज घटाया

(रणभेरी): केंद्र सरकार ने आज पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में बड़ा छूट देने का फैसला किया है। पेट्रोल पर 13 रुपये प्रति लीटर का अतिरिक्त उत्पाद शुल्क घटाकर 3 रुपये कर दिया गया है, जबकि डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर की ड्यूटी पूरी तरह हटा दी गई है।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम लगातार बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुके हैं। मध्य पूर्व में तनाव और ओपेक देशों द्वारा तेल की आपूर्ति कम होने के कारण कंपनियों पर दबाव था। इस कदम से तेल कंपनियों को घाटा कम करने में मदद मिलेगी और जनता के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रहेंगे।

हालांकि, देश के विभिन्न राज्यों में आज फिलहाल कीमतों में कोई तुरंत बदलाव नहीं दिख रहा है। केंद्र सरकार ने राज्यों से भी अपील की है कि वे अपने वैट दरों में कटौती करें ताकि आम उपभोक्ता को एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये की राहत का सीधा लाभ मिल सके।

प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल की वर्तमान कीमतें

शहर/राज्यपेट्रोलडीजल
दिल्ली94.7787.67
महाराष्ट्र103.5490.03
उत्तर प्रदेश94.6587.76
कर्नाटक102.9290.99
पश्चिम बंगाल105.4592.02
राजस्थान104.8890.36
हिमाचल प्रदेश95.2787.31
हरियाणा95.3688.40
गुवाहाटी93.2389.46
देहरादून93.1788.01
पोर्ट ब्लेयर82.4678.05
आंध्र प्रदेश109.5395.70

विशेषज्ञों का कहना है कि टैक्स कटौती के बावजूद दाम स्थिर रहने का कारण अंतरराष्ट्रीय तेल की ऊंची कीमत और तेल कंपनियों का घाटा है। सरकारी कंपनियां IOC, BPCL और HPCL लंबे समय से दाम नहीं बढ़ा रही थीं, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा था। एक्साइज ड्यूटी में राहत देने का मकसद यही है कि जनता पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।

निजी कंपनियों ने भी इस अवसर का लाभ उठाया है। Nayara Energy ने पेट्रोल पर 5.30 रुपये और डीजल पर 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है।

आम जनता को कितनी राहत मिल सकती है?

अगर तेल कंपनियां केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी में पूरी कटौती को ग्राहकों तक पहुंचाती हैं, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 10-12 रुपये तक की कमी आ सकती है। इसके साथ ही VAT पर भी असर पड़ेगा, जिससे अंतिम बचत और बढ़ जाएगी।

सरकार ने इस कदम को जनता को राहत देने और बढ़ती अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के दबाव में तेल कंपनियों के घाटे को संतुलित करने के रूप में बताया है।

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