(रणभेरी) : नोएडा के फेज-2 औद्योगिक क्षेत्र में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चल रहा फैक्ट्री कर्मचारियों का प्रदर्शन सोमवार सुबह अचानक हिंसक हो गया। शुरुआती झड़प के बाद हालात बेकाबू हो गए और विरोध कई औद्योगिक क्षेत्रों तक फैल गया। इस दौरान पथराव, वाहनों में आगजनी और फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं।
फेज-2 से शुरू हुई हिंसा, कई इलाकों में फैला विरोध
पिछले तीन दिनों से वेतन बढ़ोतरी और ओवरटाइम भुगतान को लेकर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारी सोमवार सुबह फेज-2 क्षेत्र में बड़ी संख्या में एकत्र हुए। सबसे पहले मदरसन कंपनी के बाहर जमा करीब 500 कर्मचारियों के बीच विवाद के बाद स्थिति बिगड़ गई और पथराव शुरू हो गया।

इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर उतरकर हंगामा किया और कई वाहनों व बसों को आग के हवाले कर दिया। पुलिस द्वारा रोकने की कोशिश पर प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहन पलट दिया और पथराव किया। स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े तथा अतिरिक्त बल और पीएसी को तैनात किया गया।


10 औद्योगिक क्षेत्रों में फैला आंदोलन
फेज-2 में हिंसा के बाद प्रदर्शन धीरे-धीरे नोएडा के करीब 10 औद्योगिक क्षेत्रों तक फैल गया। कर्मचारियों ने सेक्टर-1, 15, 62 और DND फ्लाइओवर के पास सड़क जाम कर दिया। सेक्टर-40 और 60 में कंपनियों का घेराव किया गया, जबकि सेक्टर-85 में कर्मचारियों ने कई कंपनियों में जबरन प्रवेश की कोशिश की। सेक्टर-57 में लगभग 30 फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की सूचना है। कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं।

प्रशासन और पुलिस अलर्ट, उच्च अधिकारी हालात पर नजर रखे हुए
स्थिति बिगड़ने पर कई थानों की पुलिस बल के साथ पीएसी को मौके पर भेजा गया। सभी औद्योगिक इकाइयों के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। डीजीपी राजीव कृष्ण और एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) अमिताभ यश पुलिस मुख्यालय के कंट्रोल रूम से स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। पुलिस ने कहा है कि अफवाह फैलाने वालों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन और कंपनियों का पक्ष
प्रशासन ने कर्मचारियों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। नोएडा डीएम मेधा रूपम ने बताया कि कंपनियों के साथ हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं, जिनमें शामिल हैं—

- हर कारखाने में यौन उत्पीड़न रोकथाम समिति का गठन
- शिकायत पेटी की व्यवस्था
- हर महीने 10 तारीख तक वेतन भुगतान
- वेतन पर्ची अनिवार्य करना
इसके साथ ही प्रशासन ने 11 बिंदुओं की सहमति की जानकारी दी, जिनमें ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, साप्ताहिक अवकाश और बोनस समय पर देने जैसे प्रावधान शामिल हैं। कई कंपनियों ने अपने गेट पर नोटिस लगाकर कहा है कि मांगों पर सहमति बन चुकी है और कर्मचारी अफवाहों पर ध्यान न दें।
1. श्रमिकों को ओवरटाइम का भुगतान दोगुनी दर से किया जाएगा।
2. प्रत्येक श्रमिक को साप्ताहिक अवकाश दिया जाएगा।
3. रविवार को काम कराने पर दोगुना पेमेंट करना होगा।
4. श्रमिकों के नियमानुसार बोनस का भुगतान 30 नंवबर तक बैंक खातों में जाएगा।
5. फैक्ट्रियों के बाहर CCTV कैमरे चालू हालत में रहें।
6. फैक्ट्रियों के बाहर शासन की गाइडलाइंस नोटिस बोर्ड पर अनिवार्य रूप से लगाई जाएं।
7. श्रमिकों और औद्योगिक इकाइयों की समस्याओं के समाधान के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया। 0120-2978231, 0120-2978232, 0120-2978862 और 0120-2978702 नंबर जारी किए गए हैं।
8. प्रत्येक कारखाने में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम समिति गठित।
9. प्रत्येक श्रमिक का वेतन प्रत्येक माह की 10 तारीख के भीतर एकमुश्त भुगतान किया जाएगा।
10. सभी श्रमिकों को वेतन पर्ची अनिवार्य रूप से प्रदान की जाएगी।
11. शिकायत पेटी लगाई जाएगी।
कर्मचारियों की मांगें
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि वर्तमान में प्रस्तावित वेतन वृद्धि बहुत कम है। उनका कहना है कि 250–300 रुपये की बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है। कर्मचारी न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये करने और ओवरटाइम भुगतान में सुधार की मांग पर अड़े हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
प्रदेश के राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप ने आंदोलनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार उद्योग और रोजगार के विकास के लिए काम कर रही है और किसी को भी कानून व्यवस्था भंग नहीं करनी चाहिए। फिलहाल कई इलाकों में तनाव बना हुआ है, हालांकि पुलिस और प्रशासन लगातार स्थिति को नियंत्रित करने और कर्मचारियों से बातचीत करने की कोशिश कर रहे हैं।
