(रणभेरी): जनपद की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर कटघरे में है। बीते एक सप्ताह में दो अलग-अलग मामलों ने सरकारी और निजी चिकित्सा तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। एक ओर मानक विहीन निजी अस्पताल में कथित तौर पर संचालक द्वारा ऑपरेशन किए जाने के बाद प्रसूता की जान चली गई, वहीं दूसरी ओर जिला महिला अस्पताल में प्रसव पीड़ा से जूझ रही 25 वर्षीय नेहा गोंड और उसके गर्भ में पल रहे शिशु की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि समय पर जांच और उपचार नहीं मिलने से यह त्रासदी हुई।
जांच की जगह ताने, परिजन करते रहे गुहार
सहतवार थाना क्षेत्र के हसनपुरा विषैली गांव निवासी पप्पू गोंड की पत्नी नेहा को शनिवार सुबह प्रसव पीड़ा होने पर जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिवार बेहतर इलाज की उम्मीद से उसे सुबह करीब छह बजे अस्पताल लाया था।परिजनों के अनुसार भर्ती के कुछ समय बाद ही दर्द तेज हो गया। देवर डब्लू गोंड ने बताया कि नर्सों और कर्मचारियों को बार-बार सूचित करने के बावजूद जांच नहीं की गई, उलटे उन्हें ताने सुनने पड़े। आरोप है कि गर्भवती की हालत बिगड़ने लगी, वह पसीने से तर-बतर हो गई और बेहोशी की स्थिति में पहुंच गई।
अस्पताल परिसर में हंगामा, सेवा बाधित
मौत की खबर मिलते ही परिजन आक्रोशित हो उठे। चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उन्होंने अस्पताल में हंगामा किया। करीब दो घंटे तक आपातकालीन सेवाएं प्रभावित रहीं। सूचना पर पहुंची पुलिस ने समझाइश देकर स्थिति को शांत कराया।
परिवार ने पोस्टमार्टम से इंकार कर दिया, जिसके बाद शव वाहन से मृतका का शव घर भेजा गया। गांव में मातम का माहौल है।
नियमित जांच के बावजूद हादसा
परिजनों का कहना है कि नेहा पिछले पांच-छह महीनों से हर माह महिला अस्पताल में जांच करा रही थी और रिपोर्ट सामान्य बताई जाती थी। परिवार नए मेहमान के आगमन की तैयारी में था, लेकिन अचानक आई इस घटना ने खुशियों को मातम में बदल दिया।
24 घंटे ऑपरेशन सुविधा पर सवाल
जिला महिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी लंबे समय से चर्चा में है। सूत्रों के अनुसार दोपहर बाद भर्ती होने वाली कई गर्भवतियों को रात भर इंतजार करना पड़ता है। गंभीर स्थिति होने पर भी ऑपरेशन से परहेज किया जाता है और सामान्य प्रसव का इंतजार कराया जाता है।
रात 11 बजे के बाद प्रसव कक्ष प्रायः नर्सों के भरोसे चलने की बात भी सामने आती रही है। नेहा के मामले में भी ड्यूटी परिवर्तन के बाद डॉक्टर द्वारा समय पर जांच न करने का आरोप लगाया गया है।
निजी नर्सिंग होम पर भी उठे सवाल
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि कुछ चिकित्सक सरकारी अस्पताल में तैनाती के साथ निजी नर्सिंग होम का संचालन करते हैं। आरोप है कि कई मामलों में गंभीर बताकर मरीजों को निजी केंद्रों की ओर रेफर किया जाता है, जहां ऑपरेशन कराया जाता है।
प्रशासन ने दिए जांच के संकेत
प्रभारी सीएमओ डॉ. विजय यादव ने कहा कि गर्भवती की मौत के मामले की गहन जांच कराई जाएगी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
दो मौतों के बाद जनपद में मातृत्व सेवाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है। परिजन दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं प्रशासन ने जांच के बाद कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
