वाराणसी (रणभेरी): मणिकर्णिका घाट को लेकर उठे विवाद और रानी अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति तोड़े जाने के आरोपों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को वाराणसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि काशी को बदनाम करने की सुनियोजित साजिश रची जा रही है और कुछ लोग बीते 11 वर्षों में हुए विकास के रास्ते में जानबूझकर बाधा बन रहे हैं। इसी कारण उन्हें स्वयं काशी आकर स्थिति पर बात करनी पड़ी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी अविनाशी है और हर भारतीय की आस्था का केंद्र रही है, लेकिन स्वतंत्र भारत में लंबे समय तक वह विकास नहीं हो पाया, जिसकी वह हकदार थी। पिछले 11 वर्षों में काशी ने अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए नई ऊंचाइयों को छुआ है और वैश्विक पहचान हासिल की है।
उन्होंने 2014 से पहले की स्थिति को याद दिलाते हुए कहा कि उस समय गंगा जल आचमन तो दूर, स्नान योग्य भी नहीं था। घाटों की हालत किसी से छिपी नहीं थी। आज वही घाट देश-दुनिया के श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। गंगा जल अब आचमन और स्नान दोनों के योग्य है।
अहिल्याबाई होल्कर के योगदान का उल्लेख
सीएम योगी ने कहा कि औरंगजेब द्वारा बाबा विश्वनाथ मंदिर ध्वस्त किए जाने के बाद उसके जीर्णोद्धार का पहला प्रयास रानी अहिल्याबाई होल्कर ने किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कभी उनके योगदान का सम्मान नहीं किया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विरासत को देश के सामने सम्मान के साथ रखा।
उन्होंने कहा कि बीते कुछ दिनों से झूठी तस्वीरें और भ्रामक सामग्री फैलाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश हो रही है। जो लोग अपने शासनकाल में विरासत का संरक्षण नहीं कर पाए, वही अब भ्रम फैलाने में जुटे हैं।
विरासत और आस्था पर राजनीति का आरोप
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की आस्था का अपमान करने वाली राजनीति ने कभी काशी का सम्मान नहीं किया। उन्होंने अन्नपूर्णा मंदिर की प्रतिमा के यूरोप पहुंचने और प्रधानमंत्री मोदी के प्रयास से उसकी वापसी का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि पहले ऐसी कोशिशें क्यों नहीं हुईं।
सीएम योगी ने स्पष्ट कहा कि यह कहना कि मंदिर तोड़े गए हैं, सबसे बड़ा झूठ है। मंदिर पहले जर्जर अवस्था में थे, अब उनका विधिवत जीर्णोद्धार किया जा रहा है। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर बनने के बाद जहां पहले एक साथ पांच हजार श्रद्धालु दर्शन कर पाते थे, अब 50 हजार श्रद्धालु एक साथ दर्शन कर सकते हैं।

विकास के आंकड़े और उपलब्धियां
मुख्यमंत्री ने बताया कि काशी विश्वनाथ धाम निर्माण से पहले प्रतिदिन 5 से 25 हजार श्रद्धालु आते थे, जबकि अब यह संख्या 1.25 से 1.5 लाख प्रतिदिन तक पहुंच चुकी है। सावन, शिवरात्रि और अन्य पर्वों पर यह आंकड़ा 6 से 10 लाख तक पहुंच जाता है। पिछले वर्ष 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने काशी विश्वनाथ के दर्शन किए।
उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से देश की अर्थव्यवस्था में करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये का योगदान हुआ है। पुरोहितों, गाइडों, व्यापारियों, नाविकों, टैक्सी चालकों सहित हजारों लोगों को रोजगार मिला है। पहले डीजल और केरोसिन से चलने वाले स्टीमर अब सीएनजी पर आ गए हैं, जिससे नाविकों की आमदनी बढ़ी है।

शिक्षा, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी में विस्तार
सीएम योगी ने बताया कि बीएचयू में नए शैक्षणिक संस्थान खुले हैं, काशी को कैंसर उपचार जैसी उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएं मिली हैं। वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों से देश के विभिन्न हिस्सों से कनेक्टिविटी मजबूत हुई है। देश का पहला शहरी रोपवे काशी में बना है। 55 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं, जिनमें से 36 हजार करोड़ रुपये के कार्य पूरे हो चुके हैं।
धार्मिक अनुष्ठान और सुरक्षा व्यवस्था
प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले मुख्यमंत्री ने काल भैरव मंदिर में आरती की और बाबा विश्वनाथ धाम में विधिवत पूजन-अर्चन किया। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। एसीपी गौरव कुमार ने पुलिस बल को निर्देश दिए कि किसी भी तरह की जबरन घुसपैठ या धरना-प्रदर्शन की कोशिश को रोका जाए। मुख्यमंत्री ने अंत में दोहराया कि काशी को बदनाम करने की हर कोशिश का तथ्य और सच्चाई के साथ जवाब दिया जाएगा। काशी की पहचान उसके पवित्र मंदिरों, मां गंगा और सतत विकास से है, जिसे कोई साजिश धूमिल नहीं कर सकती।

