वाराणसी (रणभेरी): देश के लोकप्रिय स्टैंड-अप कॉमेडियन जाकिर खान शनिवार को आध्यात्मिक नगरी काशी पहुंचे। बिना किसी तामझाम के, आम श्रद्धालक और पर्यटक की तरह उन्होंने गंगा घाटों पर समय बिताया। पहचान से बचने के लिए उन्होंने चेहरा मास्क से ढका हुआ था, ताकि शहर को करीब से और सुकून के साथ महसूस कर सकें। काशी प्रवास के दौरान जाकिर खान ने गंगा में नौकायन किया और तट पर बैठकर चाय-बिस्कुट का आनंद लिया। हालांकि सादगी के बावजूद उनके प्रशंसकों ने उन्हें पहचान लिया। इसके बाद घाटों पर उनके साथ सेल्फी लेने की होड़ लग गई। फैंस के प्यार और अपनापन देखकर जाकिर भी मुस्कराते नजर आए।
घाटों पर घूमते हुए जाकिर खान ने कहा कि काशी में आकर आत्मिक शांति का अनुभव होता है। उन्होंने बताया कि व्यस्त जीवन, मंचीय प्रस्तुतियों और लगातार यात्राओं के बीच काशी जैसे स्थान मन को ठहराव देते हैं। गंगा की अविरल धारा, आरतियों की गूंज और घाटों का माहौल उन्हें बार-बार यहां खींच लाता है। इस दौरान जाकिर खान के साथ रचित गुप्ता भी मौजूद रहे। उन्होंने जाकिर को काशी के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पक्षों से रूबरू कराया। प्राचीन घाटों की विरासत और बनारस की जीवनशैली ने जाकिर को खासा प्रभावित किया।

संघर्ष से सफलता तक का सफर
जाकिर खान एक सफल स्टैंड-अप कॉमेडियन होने के साथ-साथ लेखक, कवि, प्रस्तुतकर्ता और अभिनेता भी हैं। साल 2012 में कॉमेडी सेंट्रल के मंच पर ‘भारत के सर्वश्रेष्ठ स्टैंड-अप कॉमेडियन’ का खिताब जीतकर उन्होंने राष्ट्रीय पहचान बनाई।
जाकिर का जन्म इंदौर के बंबई बाजार क्षेत्र में एक राजस्थानी मुस्लिम परिवार में हुआ। संगीत उन्हें विरासत में मिला। उनके दादा उस्ताद मोइनुद्दीन खान प्रसिद्ध सारंगी वादक थे, जबकि पिता इस्माइल खान संगीत शिक्षक हैं। स्वयं जाकिर भी सितार बजाते हैं। रेडियो जॉकी बनने का सपना लेकर वे 2008 में दिल्ली पहुंचे, जहां रेडियो का शॉर्ट टर्म कोर्स किया और निजी एफएम चैनल में इंटर्नशिप भी की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद वे इंदौर लौट आए और यहीं से कॉमेडी की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने की शुरुआत की।

ओटीटी पर भी जमाया जलवा
जाकिर खान अमेजन प्राइम वीडियो पर चार स्टैंड-अप स्पेशल शो कर चुके हैं। साल 2017 में ‘हक से सिंगल’ से शुरुआत करने वाले जाकिर ने ‘कक्षा ग्यारहवीं’, ‘तथास्तु’ और हाल ही में ‘मनपसंद’ के जरिए दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। काशी यात्रा के दौरान भी जाकिर खान की वही सादगी, आत्मीयता और जमीन से जुड़ा व्यक्तित्व नजर आया, जिसने उन्हें आम लोगों के बीच खास बना दिया है।
