वाराणसी (रणभेरी) : मणिकर्णिका घाट पर कथित बुलडोजर कार्रवाई का वीडियो वायरल होने के बाद मामला केवल प्रशासनिक नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ गया है। इंदौर से काशी तक विरोध की आवाजें उठने लगी हैं। रानी अहिल्याबाई होल्कर से जुड़े धार्मिक स्थलों और कलाकृतियों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों के बीच शुक्रवार को नगर निगम और जनप्रतिनिधियों की टीम मौके पर पहुंची।
मेयर अशोक तिवारी, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल और विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने घाट का निरीक्षण किया। विधायक तिवारी ने कहा कि किसी मंदिर या प्रतिमा को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। उनके अनुसार विपक्ष “एआई से तैयार वीडियो” के जरिए भ्रम फैला रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मणिकर्णिका घाट का नवीनीकरण योजनाबद्ध ढंग से हो रहा है। ड्रिलिंग के दौरान वाइब्रेशन से क्षतिग्रस्त हिस्सों में रखी मूर्तियों को संस्कृति विभाग के संरक्षण में रखा गया है और रानी अहिल्याबाई की प्रतिमा को भी सुरक्षित कर पुनः स्थापित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि हरिश्चंद्र घाट के साथ मणिकर्णिका घाट का भी जीर्णोद्धार हो रहा है, जिससे शौचालय, चेंजिंग रूम जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उनके मुताबिक पंडा समाज, स्थानीय नागरिक और व्यवसायी इस कार्य का समर्थन कर रहे हैं।

उधर, अस्सी घाट पर सपा महिला सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष जूही सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि रानी अहिल्याबाई से जुड़े मंदिरों और दालमंडी क्षेत्र में तोड़फोड़ हो रही है। इसे “विकास के नाम पर संस्कृति पर चोट” बताते हुए उन्होंने एसआईआर को लेकर नागरिक अधिकारों के हनन का सवाल उठाया। मायावती के एकल चुनावी फैसले पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने राजनीतिक समीकरणों पर भी प्रश्न खड़े किए।
कांग्रेस भी खुलकर मैदान में उतर आई है। पार्टी पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की। महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि पहले काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के नाम पर सैकड़ों मंदिर तोड़े गए, फिर सर्वसेवा संघ आश्रम को उजाड़ा गया, अब दालमंडी में हजारों लोगों की आजीविका पर असर पड़ा है और अब मणिकर्णिका घाट पर अहिल्याबाई होल्कर से जुड़ी धरोहरों को क्षति पहुंचने के आरोप सामने हैं। कांग्रेस ने स्थल निरीक्षण के लिए प्रशासन, स्थानीय नागरिकों और पार्टी प्रतिनिधियों की संयुक्त टीम बनाने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि एक सप्ताह में कार्रवाई न होने पर अनशन शुरू किया जाएगा। प्रदेश प्रवक्ता संजीव सिंह ने कहा कि यदि धरोहरों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

इसी बीच सारनाथ में पाल समाज की ओर से आयोजित प्रेसवार्ता में संरक्षक भैयालाल पाल ने दावा किया कि घाट पर महादेव, गणेश और रानी अहिल्याबाई की प्रतिमाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं, हालांकि प्रशासन ने उन्हें सुरक्षित रखने और पुनःस्थापना का भरोसा दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोबारा ऐसी घटनाएं हुईं तो समाज मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को अवगत कराएगा। पाल समाज ने जीर्णोद्धार मॉडल में अपने समुदाय के लिए शवदाह में आने वालों की सुविधा हेतु एक व्यवस्थित हॉल बनाए जाने की मांग भी रखी। मणिकर्णिका घाट का मामला अब विकास, विरासत और विश्वास के बीच संतुलन की कसौटी बन गया है। प्रशासन की अगली कार्रवाई पर शहर की निगाहें टिकी हैं।
