नगर निगम के आयोजन से लौटी काशी की पतंगबाज़ी परंपरा, अगले साल से राष्ट्रीय प्रतियोगिता की तैयारी
वाराणसी (रणभेरी): मकर संक्रांति की आहट के साथ ही काशी की सांस्कृतिक पहचान एक बार फिर जीवंत हो उठी। दशाश्वमेध घाट के सामने गंगा की रेती पर दो दिनों तक चले भव्य पतंग महोत्सव ने मानो पुराने बनारस को फिर से लौटा दिया। चारों ओर ‘भाक्काटे…भाक्काटे’ की गूंज, आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें और रेती पर उमड़ा जनसैलाब- दृश्य अपने आप में उत्सव का जीवंत चित्र बन गया।
नगर निगम वाराणसी की ओर से आयोजित इस प्रतियोगिता में परंपरा, रोमांच और बनारसी स्वाद का अनूठा संगम देखने को मिला। धूप में नहाए आसमान के नीचे एक ओर पतंगबाज़ों के बीच पेंच लड़ते रहे, तो दूसरी ओर कचौड़ी, जलेबी और चाय की खुशबू माहौल को और भी बनारसी बना रही थी। यह आयोजन केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि उस विरासत को पुनर्जीवित करने की कोशिश थी, जो कभी मकर संक्रांति के साथ काशी की पहचान हुआ करती थी।

आयोजकों ने कहा कि एक समय था जब मकर संक्रांति से पहले ही शहर की हर छत से ‘भाक्काटे’ की आवाज़ गूंजने लगती थी। बदलते दौर में नई पीढ़ी मोबाइल और सोशल मीडिया में उलझती जा रही है, ऐसे में यह पहल पारंपरिक खेलों से दोबारा जोड़ने की दिशा में एक ठोस कदम है।
अगले वर्ष से राष्ट्रीय स्वरूप
कार्यक्रम के दौरान महापौर ने घोषणा की कि अगले वर्ष से इस पतंग प्रतियोगिता को राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किया जाएगा। देशभर के पतंगबाज़ ऑनलाइन पंजीकरण के माध्यम से भाग ले सकेंगे। साथ ही पुरस्कार राशि को भी बड़े स्तर पर तय किया जाएगा-
प्रथम पुरस्कार: 5 लाख रुपये
द्वितीय पुरस्कार: 2.51 लाख रुपये
तृतीय पुरस्कार: 1.51 लाख रुपये
मुकाबलों में दिखा दम
प्रतियोगिता के पहले चरण में 16 टीमों के बीच आठ मुकाबले खेले गए। इसके बाद 13 जनवरी को सेमीफाइनल और फाइनल के रोमांचक मुकाबले होंगे। खिताब की दौड़ में बनारस काइट क्लब, फायर काइट क्लब, एयर लाइन्स काइट क्लब और स्काई लाइन काइट क्लब अपनी जगह पक्की कर चुके हैं।

ये रहे मौजूद
आयोजन में पार्षद सुरेश कुमार चौरसिया, प्रवीन राय, चंद्रनाथ मुखर्जी, राजेश यादव ‘चल्लू’, विवेक कुशवाहा, सिंधु सोनकर, संजय गुजराती, कनकलता मिश्रा, मदन मोहन दुबे, सीमा वर्मा, विजय द्विवेदी सहित अन्य पार्षदों के साथ अपर नगर आयुक्त सविता यादव एवं नगर निगम के अधिकारी उपस्थित रहे।
