वाराणसी (रणभेरी): वाराणसी में प्रतिबंधित सिंथेटिक मांझा और नायलॉन धागे के खुलेआम उपयोग व बिक्री को लेकर कानूनी हलचल तेज हो गई है। शहर के अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने इस मामले में जिला प्रशासन, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को विधिवत नोटिस भेजते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेशों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
नोटिस जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को संबोधित किया गया है। अधिवक्ता ने एनजीटी अधिनियम, 2010 की धारा 30(1) का हवाला देते हुए कहा है कि देशभर में सिंथेटिक मांझा और नायलॉन धागे पर पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है, इसके बावजूद वाराणसी में इसका कारोबार बेरोकटोक जारी है।
उन्होंने एनजीटी के 11 जुलाई 2017 के एक फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि पतंग उड़ाने के लिए केवल सूती धागे की अनुमति है, लेकिन बाजारों में अब भी खतरनाक सिंथेटिक मांझा और लेपित धागे बेचे जा रहे हैं। इनसे न केवल लोग घायल हो रहे हैं, बल्कि पक्षी और जानवर भी बड़ी संख्या में इसकी चपेट में आ रहे हैं।कानूनी नोटिस में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रतिबंध के बावजूद इन धागों का निर्माण और भंडारण जारी है।
पुलिस पर दुकानदारों से मिलीभगत कर नियमों की अनदेखी करने का आरोप लगाया गया है, जबकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों पर भी निष्क्रियता बरतने की बात कही गई है। साथ ही जिला प्रशासन पर भी प्रभावी कार्रवाई न करने का आरोप लगाया गया है।अधिवक्ता ने चेतावनी दी है कि यदि जिम्मेदार अधिकारी समय रहते अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में कार्यवाही शुरू की जाएगी।यह मामला शहर में प्रतिबंधित मांझे के बढ़ते खतरे और प्रशासनिक निगरानी पर एक बार फिर सवाल खड़े करता है।
