वाराणसी (रणभेरी) : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में पिछले सत्र के दौरान हिंदी विभाग में हुए विवाद के नौ महीने बाद एक छात्र को दाखिला देने का फैसला लिया गया है। अर्चिता सिंह बनाम भास्करादित्य त्रिपाठी मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने भास्करादित्य त्रिपाठी को प्रवेश देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। छात्र को फीस जमा करने के लिए लिंक भी ई-मेल कर दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की गठित उच्च स्तरीय समिति की जांच रिपोर्ट के बाद यह निर्णय लिया गया। जांच के दौरान कई अधिकारियों को फटकार भी लगाई गई। इसके बाद परीक्षा नियंता कार्यालय की ओर से भास्करादित्य त्रिपाठी का शीघ्र नामांकन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए।
पीड़ित छात्र भास्करादित्य त्रिपाठी, छात्र नेता डॉ. मृत्युंजय तिवारी और डॉ. नील दुबे ने निर्णय का स्वागत करते हुए मांग की है कि मामले में जिम्मेदार प्रोफेसरों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही यूजीसी समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की भी मांग उठाई गई है।
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष ईडब्ल्यूएस श्रेणी की वेटिंग सीटों को भरने के वरीयता क्रम में पहले स्थान पर अर्चिता सिंह का दावा था, लेकिन समय पर ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र न बन पाने के कारण विवाद खड़ा हो गया। इसके बाद अंडरटेकिंग दिए जाने के बावजूद भास्करादित्य त्रिपाठी को प्रवेश का लिंक भेज दिया गया। हालांकि छात्रा के विरोध के बाद लिंक रोक दी गई, जिसके विरोध में भास्करादित्य धरने पर बैठ गए। मामले ने तूल पकड़ते हुए विश्वविद्यालय में जातिवाद के आरोपों को भी जन्म दिया।
विवाद बढ़ने पर यूजीसी ने राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद भालेराव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। समिति की रिपोर्ट के आधार पर अब भास्करादित्य त्रिपाठी को प्रवेश देने का निर्णय लिया गया है।विश्वविद्यालय के इस फैसले को लंबे समय से चले आ रहे विवाद के पटाक्षेप के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि छात्र संगठनों का कहना है कि दोषियों पर कार्रवाई और रिपोर्ट की सार्वजनिकता से ही मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित हो सकेगा।
