वाराणसी (रणभेरी): पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की जमानत अर्जी पर बुधवार को जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत में सुनवाई होगी। इस दौरान उनके अधिवक्ता अनुज यादव की ओर से जमानत के पक्ष में बहस की जाएगी। पिछली तारीख पर विवेचक और अभियोजन की ओर से प्रपत्र अधूरे होने का हवाला देते हुए दो दिन का समय मांगा गया था, जिसके चलते सुनवाई टल गई थी।
मामले में अदालत द्वारा वारंट बी जारी किए जाने के बाद पुलिस ने 19 दिसंबर को अमिताभ ठाकुर को देवरिया जेल से लाकर प्रभारी विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राजीव मुकुल पांडेय की अदालत में पेश किया था। न्यायिक रिमांड बनने के बाद पुलिस उन्हें पुनः देवरिया ले गई। इसके बाद उनके वकील ने जमानत के लिए याचिका दाखिल की। विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कृष्ण कुमार की अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की बहस सुनने के बाद 22 दिसंबर को जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।
इसके पश्चात 23 दिसंबर को जिला जज की अदालत में जमानत अर्जी दाखिल की गई। अदालत ने सुनवाई के लिए दो जनवरी की तिथि निर्धारित की थी, लेकिन बनारस बार एसोसिएशन चुनाव के कारण मामला सुनवाई में नहीं आ सका। अब यह प्रकरण बुधवार को फिर से अदालत के समक्ष आएगा।
अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी के विरुद्ध यह मामला चौक थाने में दर्ज है। वाराणसी विकास प्राधिकरण के मानद सदस्य अंबरीष सिंह भोला ने नौ दिसंबर को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप है कि 30 नवंबर को अमिताभ ठाकुर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें बहुचर्चित कफ सीरप प्रकरण में बिना किसी ठोस साक्ष्य के अंबरीष सिंह भोला की संलिप्तता का आरोप लगाया गया। शिकायत के अनुसार वीडियो में भ्रामक और गलत तथ्यों का प्रचार किया गया, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को गंभीर क्षति पहुंची। पुलिस ने इस मामले में अमिताभ ठाकुर, उनकी पत्नी डा नूतन ठाकुर तथा एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
अदालत में अब इस बात पर निर्णय होना है कि जमानत दी जाए या नहीं। प्रकरण की सुनवाई पर न केवल अमिताभ ठाकुर और उनके परिजन बल्कि उनके समर्थक और विरोधी दोनों पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं। यह मामला व्यक्तिगत स्तर से आगे बढ़कर सार्वजनिक विमर्श का विषय बन गया है और इसके कानूनी नतीजे को लेकर शहर में व्यापक चर्चा बनी हुई है।
