डीआईओएस का निर्देश : किसी एक दुकान से खरीदारी के लिए बाध्य करना गैरकानूनी, होगी सख्त कार्रवाई
वाराणसी (रणभेरी)। नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम कसने की तैयारी तेज हो गई है। जिले के डीआईओएस भोलेंद्र प्रताप सिंह ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि कोई भी स्कूल अभिभावकों पर किताब, कॉपी, यूनिफॉर्म, जूते-मोजे आदि किसी विशेष दुकान से खरीदने का दबाव नहीं बना सकता। ऐसा करना न सिर्फ अनैतिक है, बल्कि कानूनन भी गलत है।
डीआईओएस ने कहा कि लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ निजी स्कूल अपने परिचित दुकानदारों से सांठगांठ कर अभिभावकों को वहीं से सामान खरीदने के लिए मजबूर करते हैं। इसके चलते बाजार में मनमाने दाम वसूले जाते हैं और सीधे तौर पर इसका आर्थिक बोझ अभिभावकों पर पड़ता है। कई मामलों में स्कूल प्रबंधन को कमीशन मिलने की बात भी सामने आई है। जारी निर्देशों में साफ कहा गया है कि उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम 2018 एवं 2020 के प्रावधानों का हर हाल में पालन सुनिश्चित किया जाए। सत्र 2026-27 के लिए फीस निर्धारण भी निर्धारित नियमों के अनुसार ही किया जाए और किसी भी प्रकार की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अधिकारियों ने दो टूक कहा कि स्कूल शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार का व्यावसायिक गतिविधि नहीं चला सकते। यूनिफॉर्म या किताबों की बिक्री को व्यापार का माध्यम बनाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। यदि कोई विद्यालय अभिभावकों को एक तय दुकान से सामान खरीदने के लिए बाध्य करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
इसकी सीधी जिम्मेदारी स्कूल के प्रिंसिपल और मैनेजर पर तय होगी। शिक्षा विभाग ने अभिभावकों से भी अपील की है कि यदि कहीं इस तरह की जबरदस्ती या अनियमितता देखने को मिले, तो तुरंत संबंधित विभाग में शिकायत दर्ज कराएं। विभाग का कहना है कि इस सख्ती का मकसद अभिभावकों को राहत देना और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है। हर साल फीस बढ़ोतरी और जबरन खरीदारी को लेकर उठने वाले विवादों के बीच यह निर्देश एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगने की उम्मीद है।
