वाराणसी (रणभेरी): काशी स्थित श्री विद्यामठ से जारी एक वक्तव्य में उत्तराम्नाय ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री के रवैये पर कड़ा एतराज जताया है। बयान में कहा गया है कि पिछले माह सरकार की ओर से 24 घंटे के भीतर शंकराचार्य होने से संबंधित प्रमाण मांगा गया था, जिसके प्रत्युत्तर में शंकराचार्य पक्ष ने 40 दिनों का समय निर्धारित किया था।
समय के अनुसार सोमवार, 9 फरवरी को यह अवधि पूरी हो चुकी है, लेकिन इस बीच न तो सरकार और न ही मुख्यमंत्री की ओर से स्वयं को “वास्तविक हिंदू” सिद्ध करने संबंधी कोई दस्तावेज या प्रमाण प्रस्तुत किया गया। शंकराचार्य की ओर से कहा गया कि इस चुप्पी से सरकार के आचरण पर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं और सार्वजनिक रूप से ऐसे संकेत जाते हैं जो स्वयं को हिंदू बताने के दावे को कमजोर करते हैं।

प्रेस विज्ञप्ति में पशुपालन मंत्री के एक हालिया बयान का भी संदर्भ दिया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि गोहत्या और मांस व्यापार से जुड़े कथित स्वीकारोक्ति जैसे वक्तव्य हिंदू परंपराओं और सनातन मूल्यों के प्रतिकूल हैं। शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि किसी सरकार की स्वीकृति या अस्वीकृति से शंकराचार्य पद की वैधता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
बयान में यह भी कहा गया है कि जो व्यक्ति स्वयं को हिंदू कहता है, लेकिन शंकराचार्य की परंपरा और मर्यादा को स्वीकार नहीं करता, वह अपने हिंदू होने के दावे को स्वतः कमजोर कर लेता है। अंत में आदि शंकराचार्य द्वारा प्रतिपादित ‘मठाम्नाय महानुशासन’ का उल्लेख करते हुए कहा गया कि धर्म मनुष्य का मूल तत्व है और आचार्य-आधारित व्यवस्था ही सर्वोच्च मानी जाती है।
