(रणभेरी): आधुनिक जीवनशैली में चाय और कॉफी अब सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि दिन की शुरुआत और थकान मिटाने का ज़रिया बन चुकी है। सीमित मात्रा में इनका सेवन जहां फायदेमंद माना जाता है, वहीं जरूरत से ज्यादा कैफीन का इस्तेमाल धीरे-धीरे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की वजह बन रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब चाय-कॉफी की आदत लत में बदल जाती है, तो इसका असर सीधे दिमाग और शरीर पर पड़ता है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार कैफीन एक साइकोएक्टिव तत्व है, जो नर्वस सिस्टम को उत्तेजित करता है। अत्यधिक सेवन से शरीर की एड्रिनल ग्रंथियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे तनाव हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है। इसके परिणामस्वरूप नींद न आना, घबराहट, एसिडिटी, दिल की धड़कन का तेज होना और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं सामने आने लगती हैं।
अचानक नहीं, धीरे-धीरे छोड़ना जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि कैफीन को एकदम छोड़ना नुकसानदायक हो सकता है। अचानक चाय-कॉफी बंद करने से तेज सिरदर्द, थकान और मूड स्विंग जैसी दिक्कतें होती हैं। ऐसे में सलाह दी जाती है कि सेवन को क्रमशः कम किया जाए।
यदि कोई व्यक्ति दिन में 4-5 कप चाय पीता है, तो पहले उसे 3 कप तक सीमित करे और फिर धीरे-धीरे मात्रा घटाए। इस प्रक्रिया से शरीर और मस्तिष्क को कम कैफीन के साथ तालमेल बैठाने का समय मिल जाता है।

तलब लगे तो अपनाएं हेल्दी विकल्प
चाय या कॉफी की इच्छा होने पर शरीर को सुरक्षित विकल्प देना ज्यादा फायदेमंद होता है। तुलसी, अदरक, दालचीनी या कैमोमाइल जैसी हर्बल चाय कैफीन-मुक्त होने के साथ पाचन और तनाव में भी राहत देती हैं।
कॉफी पसंद करने वालों के लिए डिकैफ कॉफी या भुने चने से बना सत्तू पेय एक बेहतर विकल्प हो सकता है। इसके अलावा विशेषज्ञ पर्याप्त मात्रा में पानी पीने पर भी जोर देते हैं, क्योंकि कई बार प्यास को ही कैफीन की चाह समझ लिया जाता है।
नींद और खान-पान निभाते हैं अहम भूमिका
कम नींद कैफीन पर निर्भरता को और बढ़ा देती है। यदि व्यक्ति रोज़ाना 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लेता है, तो शरीर को बाहरी उत्तेजक पदार्थों की जरूरत कम महसूस होती है। सुबह के समय प्रोटीन युक्त नाश्ता ब्लड शुगर को संतुलित रखता है, जिससे दिनभर सुस्ती और चाय-कॉफी की चाह कम होती है। बादाम, कद्दू के बीज और हरी सब्जियों में पाया जाने वाला मैग्नीशियम नसों को शांत रखने में मदद करता है।
