वाराणसी में डिजिटल अरेस्ट गैंग का पर्दाफाश, दो गिरफ्तार; तीसरे आरोपी की तलाश

वाराणसी में डिजिटल अरेस्ट गैंग का पर्दाफाश, दो गिरफ्तार; तीसरे आरोपी की तलाश

तीन ठिकानों पर एक साथ छापेमारी, 192 सिम स्लॉट वाले छह सिम बॉक्स समेत भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद

वाराणसी (रणभेरी) : डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराकर साइबर ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का वाराणसी पुलिस ने खुलासा किया है। साइबर क्राइम सेल और शिवपुर, लंका व चितईपुर थाने की संयुक्त टीम ने शहर में तीन स्थानों पर छापेमारी कर नेटवर्क से जुड़े दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं, गिरोह का एक अन्य सदस्य फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है।

पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी तकनीकी उपकरणों की मदद से विदेश से आने वाली इंटरनेट कॉल को भारतीय मोबाइल नंबर के रूप में प्रदर्शित करते थे। इसके बाद लोगों को फोन कर खुद को पुलिस या किसी जांच एजेंसी का अधिकारी बताते और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर रकम अपने बताए खातों में जमा करवाते थे।

पुणे में 25 लाख रुपये की ठगी से जुड़ा कनेक्शन

साइबर अपराध के नोडल अधिकारी अपर पुलिस आयुक्त नृपेंद्र के मुताबिक, साइबर क्राइम सेल को केंद्रीय साइबर पोर्टल के माध्यम से संदिग्ध मोबाइल नंबरों और म्यूल बैंक खातों से संबंधित सूचनाएं मिली थीं। इनकी पड़ताल के दौरान एक ऐसे बैंक खाते का पता चला, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में दर्ज साइबर ठगी की चार शिकायतों से जुड़ा था। इनमें महाराष्ट्र के पुणे में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 25 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला भी शामिल था।

बैंक खाते से मिले सुराग के आधार पर पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और चौक थाना क्षेत्र के सराय हरहा निवासी मोहम्मद आबिद (40) तक पहुंची। पूछताछ के दौरान शहर के अलग-अलग रिहाइशी इलाकों में सिम बॉक्स के जरिए कॉल संचालित किए जाने की जानकारी मिली।

किराये के मकानों में चल रहा था नेटवर्क

पुलिस टीम ने 14 अक्टूबर को एक साथ तीन स्थानों पर कार्रवाई की। इनमें एकता नगर की अशोकपुरम कॉलोनी, सामनेघाट स्थित बालाजी भवन और कैलाशपुरी कॉलोनी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इन स्थानों को किराये पर लेकर वहां कॉलिंग नेटवर्क चलाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक और नेटवर्किंग उपकरण लगाए गए थे।

वाराणसी में डिजिटल अरेस्ट गैंग का पर्दाफाश, दो गिरफ्तार; तीसरे आरोपी की तलाश

जांच में सिम बॉक्स आधारित ‘सिम-ओवर-आईपी’ तकनीक का इस्तेमाल सामने आया। इस व्यवस्था के माध्यम से इंटरनेट के जरिए होने वाली कॉल को भारतीय मोबाइल नंबर के रूप में दिखाया जाता था। फोन करने वाले आरोपी अपनी वास्तविक लोकेशन छिपाकर लोगों के सामने खुद को देश की किसी पुलिस या जांच एजेंसी से जुड़ा अधिकारी बताते थे। भारतीय नंबर दिखाई देने के कारण कई लोग कॉल को वास्तविक सरकारी कॉल समझकर ठगों के झांसे में आ जाते थे।

दो आरोपी गिरफ्तार, एक फरार

पुलिस ने कार्रवाई के दौरान मोहम्मद आबिद, निवासी सराय हरहा, और शशिशेखर सिंह, निवासी नवापुरा, दारानगर, वाराणसी को गिरफ्तार किया है। मामले में लखनऊ निवासी सौगात अस्थाना को भी आरोपी बनाया गया है। वह फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।

छह सिम बॉक्स समेत कई उपकरण जब्त

छापेमारी के दौरान पुलिस ने कॉलिंग नेटवर्क में इस्तेमाल होने वाले कई उपकरण बरामद किए। इनमें 32-पोर्ट क्षमता वाले छह सिम बॉक्स शामिल हैं, जिनमें कुल 192 सिम स्लॉट हैं। इसके अलावा तीन एक्साइटल राउटर/गेटवे, तीन टीपी-लिंक वायरलेस राउटर, तीन ओमाडा वीपीएन गेटवे, तीन वाई-फाई कैमरे और चार मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। पुलिस ने एयरटेल से संबंधित उपकरण, एक्सट्रीम फाइबर डिवाइस, 14 एडॉप्टर और अन्य नेटवर्किंग सामग्री भी बरामद की है। इन उपकरणों की मदद से गिरोह के कॉलिंग नेटवर्क के संचालन की जांच की जा रही है।

आईटी एक्ट के तहत मुकदमा, दोनों जेल भेजे गए

पुलिस ने गिरफ्तार दोनों आरोपियों के खिलाफ चितईपुर थाने में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66D के तहत मुकदमा दर्ज किया है। दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों, नेटवर्क के संचालन और ठगी की रकम के लेन-देन से जुड़ी कड़ियों की पड़ताल कर रही है। फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए भी प्रयास जारी हैं।

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