वाराणसी (रणभेरी): केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदले जाने की चर्चा के बीच जमीनी स्तर पर विरोध तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में बुधवार को राजातालाब क्षेत्र के आराजीलाईन विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत महगांव में मनरेगा मजदूर यूनियन की एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता यूनियन की सह-संयोजिका रेनू पटेल ने की।
बैठक में वक्ताओं ने मनरेगा का नाम परिवर्तित किए जाने को मजदूरों की पहचान और अधिकारों पर सीधा हमला बताया। उनका कहना था कि यह योजना केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि करोड़ों ग्रामीण परिवारों के जीवनयापन की गारंटी है, जिसे किसी भी सूरत में कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।

बताया गया कि देशभर में विपक्षी दलों और मजदूर संगठनों द्वारा मनरेगा के नाम परिवर्तन के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी मजदूर यूनियन गांव-कस्बों में जनसभाएं और बैठकों के जरिए श्रमिकों को एकजुट कर रही है, ताकि योजना को उसके मूल नाम और स्वरूप में बनाए रखने की मांग को मजबूती मिल सके।
बैठक में मुख्य वक्ता के रूप में पूर्वांचल किसान यूनियन के महासचिव विरेंद्र यादव मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल दिया है और इसके साथ छेड़छाड़ मजदूरों के भविष्य से खिलवाड़ है। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि नाम बदलने के पीछे असल मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है।
इस अवसर पर यूनियन के अनिल मौर्य, मुश्तफा, सरोज पटेल, कविता और पूजा प्रभा पटेल समेत ग्रामसभा महगांव, कचहरियाँ, कनकपुर और जोगापुर से आए बड़ी संख्या में ग्रामीण नागरिक उपस्थित रहे। बैठक का संचालन सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता ने किया।
बैठक के दौरान वक्ताओं ने मनरेगा से जुड़ी नीतियों में कथित खामियों की ओर भी ध्यान दिलाया और मजदूरों से सजग रहने की अपील की। अंत में यूनियन ने स्पष्ट किया कि जब तक मनरेगा के नाम और अधिकारों पर खतरा बना रहेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
