महिलाओं की सुरक्षा को लेकर घिरी योगी सरकार, तमाम वादे निकले खोखले

महिलाओं की सुरक्षा को लेकर घिरी योगी सरकार, तमाम वादे निकले खोखले

प्रदेश में हो रहे हैं आए दिन महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और बलात्कार

तौफ़ीक़ खान की कलम से-

जब प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी थी तो तमाम महिलाएं अपने सुरक्षा को लेकर आश्वस्त हो गई थी क्योंकि चुनावी रैली में योगी जी का एजेंडा ही महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देना था लेकिन अभी तक ऐसा कुछ भी होते नहीं दिख रहा है। हाल ही में हुए गाजियाबाद के घटना का हम जिक्र करे तो वहां पर भी एक पत्रकार की गोली मारकर हत्या इसलिए कर दी गई क्योंकि वह अपने परिवार की लड़कियों के साथ हो रहे छेड़छाड़ की शिकायत नजदीकी थाने में की थी। आखिर जो अपराधी हत्या करने के बाद दबोच लिए गए उन्हें पत्रकार की शिकायत पर क्यों नहीं गिरफ्तार किया गया? पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर लेती तो यह हादसा होने की गुंजाइश ही न होती। वहीं दूसरी तरफ कुछ दिन पूर्व ही एक अबोध बालिका के साथ दुष्कर्म करके हत्या करने का मामला प्रकाश में आया था। आखिर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर क्यों गंभीर नहीं है उत्तर प्रदेश की सरकार?

दबंगों के मन में नहीं है पुलिस का खौफ़:

स्पष्ट है कि प्रदेश में महिलाओं के सम्मान की सुरक्षा के लिए अधिक कड़े इंतजाम किए जाने की जरूरत है क्योंकि महिलाओं की सुरक्षा मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद से ही योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता रही है। इसके लिए एंटी रोमियो स्क्वायड गठित किए जाने के प्रयोग की चर्चा देश-विदेश में हुई। एंटी रोमियो स्क्वायड के अच्छे नतीजे भी सामने आए थे ,यह स्क्वायड कहां चले गए? क्या है यह अच्छी व्यवस्था किसी वजह से खत्म कर दी गई? इसी से जुड़ा अगला अहम सवाल यह है कि...

पुलिस छेड़छाड़ के प्रसंगों को गंभीरता से क्यों नहीं लेती?

पुलिस को ऐसे मामलों में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। यदि पुलिस शोहदों पर अविलंब सख्त कार्यवाही करना शुरू कर दे तो कोई वजह नहीं है कि महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस न करें। अगर बात छेड़छाड़ और बलात्कार जैसी घटनाओं के बारे में किया जाए तो कहीं न कहीं उत्तर प्रदेश पुलिस की भी भूमिका संदेह के दायरे में आ जाती है। जब कोई भी पीड़िता छेड़छाड़ जैसी घटनाओं को लेकर रिपोर्ट लिखवाने थाने पर जाती है तो वहां पर बैठे थानाध्यक्ष महोदय रिपोर्ट ना लिखकर उल्टा ही उससे सवाल पूछ बैठते हैं। आखिर कब जागेगी यूपी पुलिस और कब नींद खुलेगा सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ का? क्या महिलाएं अपनी सुरक्षा को लेकर एक बार फिर से आश्वस्त हो पाएंगी?