वाराणसी: कोरोना काल में बीएचयू प्रशासन का तानाशाही फरमान, खतरे में छात्रों की जान!

वाराणसी: कोरोना काल में बीएचयू प्रशासन का तानाशाही फरमान, खतरे में छात्रों की जान!

कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच छात्रों पर हॉस्टल खाली करने के लिए बनाया जा रहा दबाव
छात्रों की सता रहा स्वास्थ्य और सुरक्षा का डर, किसी हालत में नहीं जाना चाहते घर
शुरूआत में क्यों नहीं कराया गया हॉस्टल खाली, 60 दिनों तक छात्रों को मेस में भोजन था बंद

वाराणसी(रणभेरी): पूरी दुनिया इस समय कोरोना के कहर से भयभीत है। हजारों नहीं लाखों निर्दोष लोग इस महामारी की वजह से मौत के मुंह में समा चुके हैं। दिन-प्रतिदिन स्थिति और भी भयावह बनती जा रही है। मौत का आंकड़ा बढता जा रहा है। ऐसे समय में एशिया का सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय बीएचयू अपने ही सैकड़ों छात्रों को खतरे की ओर ढकलने पर तुला है। 

दरअसल बीएचयू प्रशासन ने दो दिन पहले बीएचयू हॉस्टल में रह रहे छात्रों को एकाएक 48 घंटों के अंदर हॉस्टल खाली करने का आदेश दे दिया और लगातार छात्रों पर हॉस्टल खाली करने का दबाव प्रॉक्टोरियल बोर्ड द्वारा बनाया जा रहा है। आलीशान कमरों और एसी में रहने वाले अधिकारियों को छात्रों के दुख-दर्द से कुछ भी लेना देना नहीं है। 60 दिनों तक इन छात्रों को खाना-पानी पूछने के लिए कोई नहीं गया और न ही कोई यह जानकारी लेने गया कि आपलोग कैसे जी रहे हो। अब जब कोरोना का प्रकोेप बढ़ा है तो अचानक छात्रों को हॉस्टल खाली करने का तानाशाही फरमान सुना दिया गया। इस फरमान से छात्रों की जान वाकई खतरे में है।

छात्रों का कहना है कि अगर प्रशासन को हॉस्टल खाली कराना ही था तो पहले ही करा दिए होते अब जब हर ओर कोरोना का खतरा बढा है ऐसे में हॉस्टल खाली कराने का क्या तुक है। सबसे बड़ी बात की अधिकतर छात्र गांव-गिरांव के हैं। अगर इस समय वे अपने गांव जाते हैं तो उन्हें 15-20 दिनों के लिए गांव के बाहर किसी ऐसे स्थान पर कोरेंटाइन किया जाएगा जहां पहले से भी दिल्ली, मुंबई आदि जगहों से आए हुए लोग ठहरे हुए हैं ऐसे में उनमे संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा होगा। जब छात्र खुद से भोजन का प्रबंध कर हॉस्टल में शांतिपूर्वक रहे रहे हैं तो आखिर फिर कौन सा कारण है कि बीएचयू प्रशासन उन्हें बीएचयू से जबरदस्ती भगाना चाहता है?

‘सीधे से नहीं किये तो डंडे से मारकर कराया जाएगा हॉस्टल खाली’:

बीएचयू प्रशासन ने लॉकडाउन के दौरान हॉस्टल फंसे रूइया छात्रावास के शास्त्री, आचार्य और पीएचडी के लगभग 15-20 छात्रों को गुरुवार को हॉस्टल से जबरन बाहर निकाल दिया है। लॉकडाउन के दौरान इन छात्रों को कुछ समझ नहीं रहा कि वो अब कहाँ और कैसे जाए। विश्वविद्यालय के इस रवैये से क्षुब्ध छात्र वीसी लॉज के सामने धरने पर बैठ गए। छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रॉक्टोरियल बोर्ड कल रात ये कहते हुए उनके कमरों में ताला लगा दिया की जल्दी से हॉस्टल खाली करो वरना डंडे मार कर खाली करवाएंगे। संकट की इस घड़ी में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उठाया गया यह कदम उचित नहीं है।

एक शोध छात्र ने बताया कि हममें से बहुत छात्र अलग अलग जगह से है। कुछ का घर काफी दूर है। प्रशासन सिर्फ बॉर्डर तक पहुंचाएगी, उसके आगे हम कैसे जाएंगे..? इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन भी कुछ भी सुनने को तैयार नहीं है। विश्विद्यालय प्रशासन का कहना है कि जहाँ भी जाना है जाओ, पर हॉस्टल खाली करो। 

एक और छात्र ने बताया कि जिन छात्रों को हॉस्टल से जबरन बाहर निकाला गया है उनके लिए घर भेजने की कोई व्यवस्था भी नहीं की गई है। बताया कि ऐसी परिस्थिति में अब हम कहीं के नहीं रहे। इस स्थिति को देखते हुए अन्य छात्रावास के भी छात्र अब धरने में जुट गए हैं। कहना है कि विवि प्रशासन द्वारा लिया गया निर्णय ठीक नहीं है।जब तक बीएचयू प्रशासन द्वारा हम छात्रों के हित में कोई उचित निर्णय नहीं लिया जाता तबतक हम धरने पर रहेंगे। वहीं बीएचयू के पीआरओ डा. राजेश सिंह ने बताया कि गर्मी छुट्टी होने के कारण हॉस्टल खाली करवाया जा रहा है जिससे कि हॉस्टल को रेनोवेट कराया जा सके। इसके लिए छात्रों से जबरदस्ती नहीं किया जा रहा है। धरने में चक्रपाणि ओझा,सतेन्द्र शर्मा,नवनीत, विजय,ज्ञानेश, अमन,सौरव,आदित्य,रितेश,शिवम के साथ अन्य साथी भी शामिल है। वहीं बिरला बी और लाल बहादुर शास्त्री छात्रावास में भी छात्रों के प्रदर्शन की सूचना मिली।

मनमाने तरीके से कराया जा रहा हॉस्टल खाली:

बिरला 'बी' में रहने वाले हिन्दी विभाग के शोध छात्र दिवाकर तिवारी ने बताया कि हम छात्रों ने बुधवार को चीफ प्रॉक्टर प्रो. ओ. पी. राय को अपनी शंकाओं और स्थितियों से परिचित कराया। चीफ प्राक्टर से जब हमने यह मांग की कि यूजीसी का कौन सा नियम, कौन सा लेटर छात्रों को उनके हॉस्टल से निकालकर भेजने के लिए आपको निर्देशित करता है तो वह नहीं दिखा सके। जबकि जिला प्रशासन से आज सुबह बात हुई तो बनारस के डीएम महोदय ने साफ इनकार कर दिया कि हमने ऐसा कोई गाइडलाइन भेजा है। 

छात्रों को परिसर में सुरक्षित रह जाने से विश्वविद्यालय को क्या दिक़्कत है, यह भी चीफ प्रॉक्टर ने नहीं बताया? बीएचयू के वीसी महोदय दिल्ली से 20 दिन बाद लौट के आये लेकिन बिना 14 दिन के कोरोंटाइन हुए परिसर में रह रहे हैं। फिर समझ में नहीं आ रहा कि वह कौन सी ऐसी दिक़्कत है जो विश्वविद्यालय अपने छात्रों को खतरे में डालने का निर्णय ले लिया है?