वाराणसी: चन्द पैसे पर बिक गई लक्सा थाने के दारोगा की ईमान

वाराणसी: चन्द पैसे पर बिक गई लक्सा थाने के दारोगा की ईमान

मारपीट के मामले में पीड़ित  की शिकायत सुनने की जगह एसआई आरोपियों का सेवाभाव करने में लगा

वाराणसी(रणभेरी): पैसा भी क्या चींज है कि उसके आगे बड़े बड़े लोग नतमस्तक होते हैं। कानून के रखवाले चन्द पैसे पर कब बिक जाते हैं और उनको पता भी नहीं चलता हैं। क्या पैसा ऐसा हो गया है कि हर कोई  उसके पीछे नेक और फर्ज आदायगी को छोड़ दौड़ पड़ा हैं।  कानून के रखवाले वर्दीधारी तो बेहद शर्मसार काम पैसे के पीछे करने में लगे हैं। एक तरफ प्रदेश के आलाधिकारी  अपने अधीनस्तों को पीड़ित फरियादियों की समस्या सुनने का निर्देश दें रखे हैं। बावजूद इसके पुलिसकर्मी अपने वरिष्ठ अधिकारियों के बातों को दरकिनार कर वसूली करने में लगे हैं। मौजूदा कप्तान पीड़ितों के मामले में कार्रवाई को लेकर बेहद गंभीर रहते हैं। तब हालात यह हैं कि पीड़ितों की सुनवाई थाने और चौकियों में नहीं हो रही हैं। इसके कारण भुक्तभोगियों  का अब न्यायालय  और पुलिस से भरोसा उठने लगी हैं। ऐसा ही एक मामला सोमवार को लक्सा थाने पर देखने और सुनने को मिली। 

लक्सा थाना क्षेत्र के श्रीनगर कॉलोनी में रहने वाले खोवालाल सोनकर की बहु रविवार की रात घर में खाना बना रही थी। इस दौरान उनका भतीजे श्याम, गुड्डू  और विष्णु सोनकर मिलकर बिना बात के मारपीट कर पूरे परिवार को  घायल कर दिये। मारपीट के दौरान खोवालाल और उनके बेटे विनोद, धर्मेन्द्र को  सिर में गंभीर चोट  लगने के कारण मौके पर पहुंची पुलिस ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया। साथ ही मारपीट करने आरोपियों को हिरासत में लेकर थाने भेजवाया। पीड़ितों को आरोप हैं कि जांच अधिकारी दारोगा आलोक प्रताप सिंह आरोपियों से पैसे लेकर उन्हें देर रात में छोड़ दिया। अधिकारियों को महज दिखाने के लिए दारोगा ने पीड़ित की शिकायत पर मामूली धारा में आरोपियों के विरुद्ध रपट दर्ज किया।

पीड़ितों की आगे मानें तो उक्त दारोगा मामले में सुलह कराने का दबाव बना रहा हैं। मुकदमा वापस नहीं लेने पर आरोपियों की तरफ से शिकायती पत्र लेकर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की धमकी दें रहा हैं। जबकि पुलिस के द्वारा कराए गऐ मेडिकल में पीड़ितों की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों के विरुद्ध संगीन धाराएं आईपीसी की बन रही हैं। बावजूद इसके पैसे की दम पर आरोपियों ने जांच करने वाले दारोगा को खरीद लिया। इस वजह से दारोगा पीड़ितों की बातों को सुनने से  अनसुना कर दें रहा हैं।