वाराणसी: यहां नहीं मिलता सरकारी योजनाओं का लाभ, खेत से गेहूं बीनकर गुजर रही मुसहर समाज की रातें

वाराणसी(रणभेरी): केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का दावा सरकारों द्वारा खूब जोर-शोर से किया जाता है लेकिन इनकी जमीन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। पिण्डरा विकास खंड के ग्राम सभा रमईपुर के मुसहर समाज के लोग सरकारी संसाधनों से वंचित है। समाज के लोगो को सरकारी योजनाओ के बारे में जानकारी तक नहीं है। 

ग्राम सभा रमईपुर के मुसहरों को कोई भी सरकारी सुबिधा नही मिल पा रहा है। बस्ती के लोगो के माने तो बस्ती के लोग कटे हुये गेंहू के बाल को बीनकर परिवार का भरण पोषण कर रहे है । लोगों का आरोप है कि हम लोग मुसहर है जो अनुसूचित जनजाति में आते है, इसलिये प्रधान और सरकारी कर्मचारी तथा अन्य समाज के प्राणी हम लोगो से घृणा करते है। 

प्रधान पति ने कहा- अपनी जेब से पैसा दें क्या?

प्रधान द्वारा मनरेगा का पूर्व में करवाये गये कार्यो का भुगतान तक अभी नही हुआ है जिसके लिए हम लोगो ने प्रधान और ग्राम सचिव  से कई बार कहा कि हम लोगो का पूर्व में किये गये कार्यो का भुगतान करवा दीजिये, लेकिन प्रधान पति रामु गुप्ता अपने घर से यह कह कर दूर भगा दिया कि  क्या हम अपनी जेब से तुम लोगो पैसा दे।

'न खाना-ना पानी, तहसील कार्यालय से भी भगा दिया जाता है':

बस्ती के महिलाओ ने तो यहाँ तक कहा की हम लोग 1 किलो मीटर दूर से पानी लाने जाते है,जिसके हैण्ड पम्प पर जाते है वो लोग भी हम लोगो को हेय दृष्टि से देखते है। प्रधान पति कहते हैं कि तुमलोग अछूते हो पास से दूर हटो जिसकी वजह से हम लोग समाज में कही आने जाने से डरते है, हम लोगों को सरकारी सुविधाये इसीलिए नही मिल पाती है। 

'खेत से गेहूँ बिन कर बच्चों को खिलाते हैं':

स्थानीय निवासी पप्पू बनवासी कहते हैं कि हमलोगो के पास पानी का पानी नहीं है। खाने के लिए राशन नहीं है। जब हम इसकी शिकायत ले कर तहसील पर गए तो वहा से हम लोगो को भगा दिया जाता है। हम किसानो के खेत से गेहूँ बिन कर लाते है फिर उसी को बनाकर बच्चों और परिवार वालो को खिलाते है। वहीं स्थानीय निवासी संतोष बनवासी कहते हैं कि हमलोगो ने सरकारी निर्माण कार्य में मजदूरी की जिसकी मजदूरी  अभीतक नहीं मिला है। मनरेगा में काम किये है उसका भी मजदूरी नही मिला है। हम लोगो का पासबुक प्रधान रख लिए है मागने पर हम लोगो को भगा देते है। 

'मुसहर जाती के लोग हो, गन्ध देते हो, भागो यहाँ से':

शीला देवी कहती हैं कि हम लोगो को राशन देने के लिए बुलाया गया था जब हम वहाँ गए तो भगा दिया गया। पिने के लिए एक बाल्टी पानी एक किलो मीटर दूर से लाते है। जब पिने के लिए पानी नही है तो बच्चे को और खुद कैसे नहायेंगे। वहीं कमला देवी हमलोग जहां रहते है वहां दवा का छिड़काव नही हुआ है लोग मुसहर समझ के यहाँ नही आते है कहते हैं कि तुम मुसहर जाती के लोग हो जो गन्ध देते हो, भागो यहाँ से। साबुन-सोड्डा है नही तो बच्चों को कैसे नहवायेंगे। हर गाँव में मनरेगा का काम चालु हो गया है जब यह बात प्रधान को बताई तो प्रधान पति ने भगा दीया और कहने लगे की कुछ नही करवाएंगे।