वाराणसी: घांटों पर बांसुरी बेचने वालों को देख दस साल के आदित्य ने सिखा बांसुरी बजाना

वाराणसी(रणभेरी):10 साल वह उम्र होती है जब अधिकांश बच्चे हाथों में कलम पकड़ना सीख रहे होते हैं, कॉपियों में रंग भरने की कोशिश करते हैं या किसी खेल में अपना हुनर दिखाते हैं। कहते हैं कला किसी चीज की मोहताज नहीं होती है, वह ऐसी चीज है कि व्यक्ति को किसी भी उम्र और वर्ग में आम से खास बना देती है। बनारस के घाटों पर घूमते हुए सीढ़ियों पर हमें एक 10 साल का बच्चा दिखाई देता है जो की बांसुरी बजाते हुए हर आने-जाने वाले का ध्यान खुद पर आकर्षित करता है।

गंगा घाट की सीढ़ियों पर चौथी कक्षा में पढ़ने वाले आदित्य गुप्ता को इतनी मधुरता से बांसुरी बजाते हुए देख हर कोई हतप्रभ हो जाता है। चेतगंज के रहने वाले आदित्य गुप्ता से जब यह पूछा गया कि उन्होंने बांसुरी बजाना कहां से सीखा? तो वह बड़ी मासूमियत से बताता है कि जब मैं घाट पर अपने पापा के साथ घूमने आता था तो कईयों को मैंने बांसुरी बजाते देखा। बस उन्हीं लोगों को देखकर मैंने बांसुरी बजाना सीखा।

आदित्य के पिता बबलू गुप्ता झालमुड़ी बेचने का कार्य करते हैं। वह बताते हैं कि उनका बेटा आदित्य बांसुरी बजाने की कला खुद से सीखा है। आदित्य की यह प्रतिभा उन लोगों के लिए मिसाल है जो अभाव में रहते हुए भी खुद के व्यक्तित्व का विकास अपने हुनर से कर लेते हैं।