वाराणसी: कुछ ऐसा है स्मार्ट सिटी का मूत्रालय, कागज पर हुआ सब कुछ स्मार्ट लेकिन हकीकत में रह गया डार्क

वाराणसी: कुछ ऐसा है स्मार्ट सिटी का मूत्रालय, कागज पर हुआ सब कुछ स्मार्ट लेकिन हकीकत में रह गया डार्क

पूरे शहर में कहीं भी ठीक नहीं है यूरीनल, बदबू और दुर्व्यवस्था का अंबार

वाराणसी (रणभेरी): देश की धार्मिक राजधानी, भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के विशिष्ठ व्यक्तित्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र, जहां हमेशा करोड़ो रुपये की विकास गंगा बहती रहती है, यह उस स्मार्ट सिटी की हकीकत और स्याह तस्वीर है। यह शहर के दबे-कुचले, दुबले-पतले और पिछड़े इलाके की तस्वीर नहीं है बल्कि ये उस जगह की तस्वीर है जो स्मार्ट सिटी का सेंटर है। जहां आए दिन केन्द्रीय और राज्यस्तरीय मंत्रियों का आवागमन रहता है।

जिलाधिकारी से लेकर जिले के सभी बड़े अधिकारी दिन में दर्जनों बार आते-जाते ही नहीं बल्कि यहीं बैठते भी हैं। बावजूद इसके जिला मुख्यालय के सामने के इस मूत्रालय में आदमी तो क्या एक कुत्ता भी नहीं जा सकता। मूत्रालय का कोई भी यूरिनल सही नहीं है, कहीं गंदगी तो कहीं वह खुद धाराशायी हो चुका है। बदबू ऐसी की नाक बंद करने के बाद भी उसके गंध अंदर प्रविष्ट कर ही जाती है। यह शर्मनाक नहीं बल्कि बेहयायी और निर्लज्जता की पराकाष्ठा है।

स्मार्ट सिटी की तरह इस मूत्रालय का बाहरी आवरण तो देखने में स्मार्ट है पर हकीकत में अंदर से वह पूरी तरह डार्क है। यही नहीं शहर के सबसे पॉज एरिया माने जाने वाले मैदागिन, बेनियाबाग, मालवीय मार्केट, शिवाला, लंका, सामनेघाट, कचहरी आदि जगहों के यूरीनलों की स्थिति और भी बदतर है पर इसपर किसी का ध्यान ही नहीं। हकीकत मानिए जिस दिन कोई इन अधिकारियों और निकम्में मंत्रियों को जबरन पकड़कर इन मूत्रालयों में डाल देगा उसी दिन इन्हें आम आदमी का कष्ट पता चल पाएगा।

खैर चलिए प्रधानमंत्री जी का आगमन अपने संसदीय क्षेत्र में होने वाला है तो हो सकता है और जगहों की चमकान के साथ-साथ इधर भी साहब लोगों का ध्यान पड़े और इसका कल्याण हो जाए पर यह उम्मीद भी कितनी सच होगी यह तो समय ही बताएगा। यह भी पूर्ण संभावना है कि पहले की तरह पीएम के आगमन से पूर्व लगने वाले पर्दो के पीछे शायद इन्हें छुपा दिया जाए।

यदि एसी वाले खद्दरधारी और कुर्सी वाले अधिकारी की सुदृष्टि किसी तरह इधर पड़ भी गई तो ज्यादा दिन तक वह स्थिर नहीं रहेगी। अरे इन महानुभावों को इतने बड़े-बड़े विकास कार्य जो करने हैं तो इन यूरिनलों के बारे में सोचने का समय किसके पास है।