वाराणसी: तो जमातियों से भी खतरनाक हो गया है प्रशांत उपाध्याय, कफ सिरप व्यापार का है क्षेत्रीय किंग! मंत्री नीलकंठ तिवारी को भी दे चुका है 1 लाख का पीएम रिलीफ फंड के लिये चेक

वाराणसी: तो जमातियों से भी खतरनाक हो गया है प्रशांत उपाध्याय, कफ सिरप व्यापार का है क्षेत्रीय किंग! मंत्री नीलकंठ तिवारी को भी दे चुका है 1 लाख का पीएम रिलीफ फंड के लिये चेक

मंत्री नीलकंठ तिवारी को भी दे चुका है 1 लाख का पीएम रिलीफ फंड के लिये चेक

वाराणसी(रणभेरी): रविवार से पूरे पूर्वांचल समेत पूर्वोत्तर राज्यो में प्रशांत उपाध्याय पुत्र धर्मेंद्र उपाध्याय (प्रो. राजेन्द्र ड्रग एजेंसी, वाराणसी) दहशत का पर्याय बन चुका है। रविवार को आयी इसकी कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट और इसकी बिना सुरक्षात्मक उपायों के कारोबार करने से लेकर लोगो के बीच राहत सामग्री का वितरण करना और अब इसकी जानकारी होने पर प्रशासनिक अमले में खलबली उसी तरह मच गई है जैसे तब्लीगी जमातियों को लेकर मची है। खबरों के अनुसार अभी पिछले सप्ताह ही प्रशांत उपाध्याय के पिता धर्मेंद्र उपाध्याय ने मंत्री नीलकंठ तिवारी को राहत फंड के लिए 1 लाख का चेक दिया है। 

वहीं टिक-टॉक पर प्रशांत उपाध्याय द्वारा डाले गए वीडियो में साफ दिख रहा है कि इसने बिना किसी मास्क को पहने सुरक्षा में लगे कोरोना वरियर्स को राहत सामग्री वितरित किया है। ऐसे में इसने अपनी दुकान से दवा बिक्री के समय ही नही, लोगो मे राहत सामग्री बांटते हुए भी खतरे को बांट दिया है। अगर इसके द्वारा संक्रमित होने के बाद यह कृत्य किया गया है तो निश्चित ही आने वाले दिनों में कोरोना पॉजिटिव की संख्या केवल प्रशांत उपाध्याय के कारण बढ़ सकती है ।

क्यों कहलाता है दवा व्यवसाय का क्षेत्रीय किंग:

प्रशांत उपाध्याय व इसके पिता धर्मेंद्र उपाध्याय को वाराणसी ही नही पूर्वोत्तर के राज्यो में लोग दवा व्यवसायियों में किंग के रुप मे जानते है। इसके यहां प्रमुख कम्पनियों की दवाओं के व्यापार के साथ ही एबॉट कम्पनी की फेंसिड्रिल कफ सिरप की सबसे ज्यादे बिक्री होती है। यह कफ सिर्फ गरीबो के बीच सबसे प्रचलित व सुरक्षित नशा वाला पेय माना जाता है। यह बिहार के रास्ते बांग्लादेश व नेपाल में खूब बिकता है। वहीं वाराणसी के आसपास के पूर्वांचल के जिलों और बिहार, मध्य प्रदेश ,छतीसगढ़ में भी खूब बिकता है, इस बात को सूत्रों ने बताया है। 

दरअसल प्रशांत उपाध्याय की पूरी सल्तनत फेंसिड्रिल कफ सिरप के ही इर्द-गिर्द चलती है। लॉकडाउन में जब सरकार ने शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया तो फेंसिड्रिल का व्यापार चमक उठा। बलिया जिला प्रशासन द्वारा ऐसे दुकानदारों की सूची जारी की गई है जो बलिया से वाराणसी दवाओं को खरीदने के लिये गये थे। लेकिन इस सूची में अभी भी अधिकतर व्यापारियों का नाम नही आ पाया है जो वाराणसी में इसी दवा व्यापारी से दवाएं खरीदते है। बलिया के जिला प्रशासन को यह भी जांच करनी होगी कि कितने लोगों ने प्रशांत उपाध्याय से फेंसिड्रिल कफ सिरप खरीदा है। 

सूत्रों की माने तो विशुनीपुर चौराहे के बड़े और बहेरी के दवा व्यवसायी जल्दी ही यहां से दवा लाये है। सिकंदरपुर, बेल्थरा ,बांसडीह तहसीलो के भी कई व्यापारियों का कारोबार यही से होता है ,सूत्रों ने तो यह भी बताया है कि प्रशांत उपाध्याय से दवा खरीदने वालों की सूची 50 से भी अधिक है। ऐसे में स्वतः ही इस दुकानदार से दवा खरीदने वालों को अपनी यात्रा का डिटेल जिला प्रशासन को देकर बलिया को कोरोना मुक्त बनाये रखने में सहयोग करे। दरअसल इसके यहां बिल से ज्यादे बिना बिल की दवाओं की अत्यधिक मात्रा में सेल ,इसके यहां दवा व्यवसायियों को ज्यादे आकर्षित करती है ।

आलीशान कोठी, ऐशो-आराम के साधन कर रहे हैं चुगली:

वाराणसी के मंडौली में राजेंद्र ड्रग एजेंसी के मालिक धर्मेंद्र उपाध्याय व प्रशांत उपाध्याय का बंगला देखकर आप खुद अंदाजा लगा लीजिये कि इन दोनों की लाइफ स्टाइल कितनी ऐशोआराम से युक्त है। इनके बंगले को गौर से देखिये आपको किसी फाइव स्टार होटल की झलक मिलेगी। इतना महंगा बंगला यूंही नही बन गया होगा ?

लॉक डाउन में नशेड़ियों की बनी सहायक:

बिहार, पश्चिम बंगाल,उत्तर प्रदेश और पूर्वोत्तर के राज्यों के कई लोग फेंसिड्रिल कफ सिरप का नशा करते हैं। भारत के गरीब राज्यों में शुमार किए जाने वाले बिहार में तो  ड्रग कंट्रोलर ने दवाओं के थोक विक्रेताओं को एक चिठ्ठी जारी कर फेंसिड्रिल कफ सिरप की सीमित खरीद करने की नसीहत बहुत पहले से ही दी हुई है। एक अधिकारी ने बताया है कि नौजवान इस कफ़ सिरप का बिना रोक-टोक इस्तेमाल कर रहे हैं और यह एक गंभीर खतरा बन गया है। 

सख्ती का सरकारी आदेश:

इसकी घातकता को देखते हुए देश की राज्य सरकारों ने अपने अपने ड्रग कंट्रोलर के माध्यम से राज्य के ड्रग निरीक्षकों को फेंसिड्रिल कफ सिरप की बड़ी मात्रा में स्वीकृत सीमा से ज्यादा की बिक्री पर नजर रखने के लिए भी कहा है। ड्रग कंट्रोलर के आदेश के मुताबिक अब दवाईयों को कोई थोक विक्रेता या डीलर फेंसिड्रिल की एक हज़ार से ज्यादा बोतलें नहीं खरीद सकेंगे।

सरकारी आदेश की सख्ती का ये आलम है कि थोक दवा विक्रेताओं को अगले स्टॉक की बुकिंग से पहले अपने खरीददारों का ब्यौरा देने के लिए कहा गया है। इसके अलावा थोक दवा विक्रेताओं और डीलरों को अपने ग्राहकों और उन्हें बेची गई मात्रा मासिक ब्यौरा ड्रग कंट्रोलर के दफ्तर में जमा करने के लिए कहा गया है। बिहार के रास्ते से होकर फेंसिड्रिल सिरप की बड़ी खेप बांग्लादेश और नेपाल भेजी जाती है। दोनों ही देशों में इस कफ़ सिरप को बेचने पर प्रतिबंध है। 

शराब की जगह पर कफ सिरप:

संजय और उसके दोस्त रोजाना फेंसिड्रिल की पांच-छह बोतलें गटक जाया करते थे, जिसकी बाद में मौत हो गयी। संजय कहते हैं, 'हां, यह बाजार में आसानी से मिल जाता है। शहर के हर कोने में इसे खरीदा जा सकता है। लेकिन कभी कभार हमने कोरेक्स, रेकोडेक्स और रेक्सॉफ जैसे अन्य कफ सिरप भी चखे।' लेकिन सवाल यह उठता है कि शराब की जगह पर कफ सिरप या किसी दूसरी उत्तेजना वर्धक दवाई का सेवन करने के बाद कैसा महसूस होता है और ऐसा क्यों होता है।

इसके जवाब में संजय ने बताया,“पहली वजह तो यह है कि यह शराब से सस्ती है। इससे मन शांत होता है, सुरूर बढ़ता है और खुमारी चढ़ती है। ज्यादा असर के लिए कई बार नशेड़ी कफ सिरप पीने के बाद चाय या मिठाई भी खाते हैं।'

सेक्स लाइफ पर असर:

उन्होंने बताया कि लेकिन असली नशा तब चढ़ता है जब फेंसिड्रिल सिरप पीने के बाद नशेड़ी नाइट्रोजन, नाइट्रावेट और प्रॉक्सीवॉन जैसे चीजों का सेवन करते हैं। लेकिन फेंसिड्रिल का असर सेक्स लाइफ पर भी पड़ता है। अब वह देश के नौजवानों और किशोरों से कफ सिरप के चंगुल में न पड़ने की अपील करते हैं और कहते हैं कि यह उन्हें ‘मौत और नपुंसकता’ की ओर ले जाएगा।

क्या कहते हैं नियम:

एक थोक दवा विक्रेता ने नाम न जाहिर करने की शर्त बताया, 'ड्रग और कॉस्मेटिक एक्ट के नियम 67 और 97 के तहत कोडाइन की मौजूदगी वाले कफ सिरप निर्धारित मात्रा में खुले बाजार में बेचे जा सकते हैं। इन्हें कहीं लाया ले जाया भी सकता है। इन्हें स्टॉक किया जा सकता है। दवा की दुकान पर इनकी बिक्री की जा सकती है।'

वह आगे बताते हैं कि लेकिन असली समस्या फेंसिड्रिल की नकली बोतलों की है जो कि इस्तेमाल में लाई जा रही है। यह जानलेवा और खतरनाक है। उद्योग जगत की प्रतिनिधि संस्था ऐसोचैम की एक रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में 100 बार दवाईयां खरीदने पर 40 बार नकली दवा खरीदने की संभावना रहती है।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में मिलने वाली प्रत्येक चार दवाओं में से एक अवैध है। इस बात की आशंका जताई गई है कि अवैध और खराब गुणवत्ता वाली दवाईयों का कारोबार तकरीबन 40 हजार करोड़ रुपए का है और यह सालाना 25 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। भारत का दवा उद्योग दुनिया के चौथे सबसे बड़े बाजार के तौर पर जाना जाता है जबकि बाजार के मूल्यांकन के हिसाब से यह दुनिया में 13 वें स्थान पर है।

(साभार- बलिया एक्सप्रेस और फेंसिड्रिल से सम्बंधित जानकारियां बीबीसी हिंदी सेवा से )