वाराणसी: दुर्दशा का शिकार हुआ ओलंपियन विवेक सिंह स्टेडियम, खेल की जगह लग रही सब्जी मंडी

वाराणसी: दुर्दशा का शिकार हुआ ओलंपियन विवेक सिंह स्टेडियम, खेल की जगह लग रही सब्जी मंडी

साहेब इधर भी ध्यान दीजिए, कुछ खिलाड़ियों का भी इंतजाम कीजिए
अनेकों राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों को जन्म देने वाला स्टेडियम बना सब्जी मंडी अखाड़ा
मिनी स्टेडियम विकास समिति से लगायत क्षेत्रीय जनमानस ने कई बार डीएम से लगाई गुहार

रिपोर्ट: विक्की मध्यानी

वाराणसी(रणभेरी): शिवपुर अपने जहन में याद करिए,और अपने दिमाग पर बल दीजिए तो याद आ जाएगा कि हाकी के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी स्वर्गीय विवेक सिंह के नाम पर सन 2005 में शिवपुर मिनी स्टेडियम का नाम ओलंपियन विवेक सिंह स्टेडियम पड़ा। स्टेडियम ने देश को कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिए।देश के साथ खिलाड़ियों का नाम विश्व स्तर पर जगमगाया।जहां स्कूलों के लिए सरकार द्वारा आयोजित कई प्रतियोगिता इस स्टेडियम में समय-समय पर कराई जाती है लेकिन इसकी दीन हीन दशा देखकर यह लग ही नहीं रहा कि यह वही ओलंपियन विवेक सिंह मिनी स्टेडियम है जहां के मथ पर भारत को कई विश्व स्तर रत्न उपलब्ध कराएं हैं। 

जानकारी के अनुसार आपको बताना चाहेंगे कि विश्व के शीर्ष पर पहुंचाने में मुख्य रूप से भारत के अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी मुस्ताक अली,बैडमिंटन खिलाड़ी राजन सिंह,विश्व कप खेलने वाले ललित उपाध्याय,उत्तर प्रदेश से जूनियर -सीनियर नेशनल हॉकी चैंपियनशिप कप खेलने वाले सुधीर सिंह,सुशील राय, स्वर्गीय पूनम चौहान पूजा चौहान,अजनाल शाह कप खेलने वाले सुमित कुमार,यूथ ओलंपिक गेम खेलने वाले प्रशांत चौहान,जौहर कप खेलने वाले गोपी सोनकर एवं विशाल सिंह प्रमुख है।

स्टेडियम से खेले हुए कई खिलाड़ी देश के रेलवे से लगायत विभिन्न सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।स्टेडियम में प्रतिदिन हॉकी,क्रिकेट,बैडमिंटन,फुटबॉल इत्यादि खेल के तकरीबन 700 बालक-बालिकाएं अभ्यास करते हैं।यहाँ क्षेत्रीय नागरिक रोज योगाभ्यास के साथ टहलने आते हैं।

ठेले-झुग्गी वाले लगा रहे हैं सब्जियों की दुकान:

लॉकडाउन के उपरांत जिला प्रशासन द्वारा स्टेडियम में सब्जी मंडी स्थानांतरित की गई।सब्जी विक्रेताओं द्वारा समय अवधि पूर्ण होने के पश्चात बची हुई खराब सब्जी व गंदगी छोड़ने पर मैदान में गंदगी व बदबू बिखरी रहती है।जो कोरोनावायरस महामारी के बावजूद कई बड़ी-विकराल बीमारी का रूप ले सकती है।गंदगी के कारण मैदान आवारा पशुओं का चारागाह स्थल बन गया है।मिनी स्टेडियम विकास समिति द्वारा घास व साफ-सफाई कर सुंदरीकरण किया गया था,परंतु मौजूदा हालात यह है कि सब नष्ट होते हुए केवल गंदगी का अंबार ही लगा रहता है।

क्षत-विक्षत करने की छूट:

लॉक-डाउन क्या लगा मानो सभी को स्टेडियम तबाह करने की खुली छूट मिल गई,सुबह सब्जी विक्रेता अपराहन: में आवारा पशु और रात में वाहन सीखने वालों की मनमानी से स्टेडियम कराह उठा है। विगत 4 वर्षों से दीपावली के वक्त ईसमे पटाखों की दुकान लगवा दी जाती है।दुकानों व वहां आए ग्राहकों की भीड़ से बची-कुची स्टेडियम की स्थिति और भी दयनीय हो जाती है।समिति के सदस्यों का कहना है कि समय रहते प्रशासन ने इस पर ध्यान नहीं दिया तो खेल प्रेमी व खिलाड़ियों की सकारात्मक सोच पर जो हानि होगी वह कभी भविष्य में पूरी नहीं की जा सकती।अगर इसी प्रकार नान सपोर्ट एक्टिविटी कराई जाती रही तो स्टेडियम से महान ओलंपियन विवेक सिंह का नाम हटा ही देना चाहिए।

किसके अधिकार पर?

लोगों का सवाल है, स्टेडियम को तन,मन और धन से सींच कर हम लोगों ने सुंदर बनाया था,उसे बर्बाद करने का अधिकार दूसरों को किसने दे दिया? स्टेडियम को बर्बाद करना खेलो इंडिया मुहिम का अपमान है। समिति ने जिलाधिकारी से निवेदन किया है कि स्टेडियम से सब्जी मंडी को अतिशीघ्र कहीं और स्थानांतरित किया जाए,ताकि खिलाड़ी पुन: अभ्यास कर सकें।और स्वस्थ समाज का निर्माण करें।