वाराणसी: रामनगर थाने के कस्बा इंचार्ज शह पर रामनगर में चल रहे अवैध कार्य!

वाराणसी: रामनगर थाने के कस्बा इंचार्ज शह पर रामनगर में चल रहे अवैध कार्य!

दारोगा अजय प्रताप पैसा लेकर गलत कार्यों को करने की दे देते हैं परमिशन!
बीते फरवरी में न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दिया था अजय के विरुद्ध कार्रवाई का निर्देश
एसएसपी ने दिया था 15 दिनों के अंदर कार्रवाई का आदेश, पर अभी तक नहीं हुई कोई कार्रवाई 

प्रमुख संवाददाता-

वाराणसी(रणभेरी): रामनगर थाने के कस्बा के इंचार्ज अजय प्रताप सिंह की पहुंच शासन और सत्ता के गलियारें में कुछ इस कदर हैं कि उनके सैकड़ों गलतियों के बावजूद दारोगा के खिलाफ कार्रवाई करने से एसएसपी सहित आलाधिकारी बचते रहते हैं। इसका नतीजा है कि दारोगा अजय प्रताप सिंह अपनी मनमानी करते हुए थानेदार के ऊपर भी हावी रहते हैं। थानेदार विनोद कुमार मिश्रा भी अजय प्रताप से कोई  बात कहने में बचते रहते हैं। थाने के सूत्रों की मानें तो कस्बा इंचार्ज अजय प्रताप आए दिन पैसे की लेनदेन को लेकर पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों के साथ मारपीट करते था। 

थाने पर शिकायत लेकर आने वाले लोगों को मां-बहन की गालियां भी सरेआम देते हैं जिसका कुछ दिनों पहले ऑडियो भी वायरल हुआ था। सूत्रों ने आगे बताया कि हर काम को करने का रेट दर दारोगा निर्धारित कर रखे हैं। इलाके में रहने वाले इनके गंदे कारनामे से परेशान हो गए हैं। लॉकडान के बीच मुर्गा और मछली का दुकानें लगवाकर मोटी रकम वसूली करने में लगे हैं। रामनगर थाने पर तैनात एक पुलिसकर्मी ने दारोगा के आतंक से अपना पोस्टिंग थाने पर करा लिया। हाइवे पर बालू, गिट्टी और ईट की मंडी लगवाने और ओवरलोड चलने वाले चालकों से महीना वसूलने के भी आरोप अजय प्रताप पर लगे हैं। 

न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दिए थे कार्रवाई के आदेश:

जिला और सत्र न्यायालय के न्यायिक  मजिस्ट्रेट ने बीते फरवरी माह में दारोगा अजय प्रताप सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए एसएसपी प्रभाकर चौधरी को निर्देश दिये थे। दरअसल एक छेड़खानी के मामले में कलमबंद बयान न लेकर अजय प्रताप ने सीधा न्यायलय में प्रस्तुत कर दिया था इस संदर्भ में दारोगा को न्यायिक मजिस्ट्ेट ने विधिक जानकारी के मामले में अनपढ़ बताया, और कहा कि दारोगा को कोई भी विधिक जानकारी नहीं है। इतना सब होने के बावजूद  दारोगा अजय प्रताप सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने का जहमत एसएसपी ने उठाई। 

सुलह के बाद भी दारोगा की शह पर करने लगे अवैध निर्माण:

अभी चार दिन पहले रामनगर के पठानी टोला निवासी योगेन्द्र यादव और महेन्द्र प्रजापति में जमीनी विवाद था। जिसका सुलह थाने में ही एक सप्ताह पहले हुआ था और सुलह में यह लिखा गया था कि जमीन की कागजात न्यायपालिका परिषद से निकालने और नापी के बाद इसका निस्तारण होगा, इस दौरान दोनो पक्ष जमीन पर कोई निर्माण नहीं कराएगा। इसी बीच आरोप है कि दूसरे पक्ष ने दारोगा अजय प्रताप सिंह से बातचीत की, रुपये की लेन-देन भी हुई और दारोगा ने कह दिया कि तुम जाओ जमीन पर निर्माण कराओ कुछ नहीं होगा। दारोगा का शह पाकर दूसरा पक्ष निर्माण कार्य कराने लगा। इस दौरान अजय प्रताप सिंह मौके पर पहुंचे भी थे और पहले पक्ष से कहा कि निर्माण कार्य होगा। पहले पक्ष ने सुलह में निर्माण न कराने की बात का हवाला देकर निर्माण रोकना चाहा तो महेन्द्र प्रजापति ने योगेन्द्र यादव के सर पर लोहे के रॉड से प्रहार कर सर फोड़ दिया। जिसका वीडियो और ऑडियो एसएसपी सहित आलाअधिकारियों को भेजा गया। पर विडंबना की इस पर कार्रवाई नहीं हुई।

मौके पर पहुंचे सीओ कोतवाली ने कोई निर्माण कराने से रोक लगा दिया पर किसी ने यह सवाल नहीं उठाए कि जब सुलह में निर्माण नहीं करने की बात की गई थी तो किससे शह पर बीच में ही महेन्द्र प्रजापति निर्माण कराने लगा। सरासर दोष तो उसका है पर अजय प्रताप सिंह के पैरवी के चलते ही उसपर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबकि सारी घटना अजय प्रताप सिंह के संरक्षण में हुई। पर सभी अधिकारी चुप रहे। कोई जांच भी नहीं हुई दूसरे पक्ष ने विरोध किया तो अजय प्रताप सिंह द्वारा मां-बहन की गाली और धमकी देकर उन्हें दबा दिया गया। अगर इस मामले की जांच हो जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा और अजय प्रताप सिंह के काले कारनामे की पोल खुल जाएगी।

शराब तस्करी कराने के मामले में भी थी चर्चा:

बीते सितंबर महीने में शराब तस्करी कराने में पकड़े गए पुलिस कर्मियों  में दारोगा अजय प्रताप सिंह का भी नाम सूत्रों की मानें तो आया था, लेकिन अपने ऊंची पकड़ और पैसे की दम पर वरिष्ठ अधिकारियों को मैनेज कर लिये। आगे सूत्रों ने यह भी बताया कि पूर्व इंस्पेक्टर अनूप शुक्ला को कुछ नहीं समझाता था।  

पैसा लेकर कोई भी मामला कर देते हैं रफा-दफा:

सूत्र बताते हैं कि दारोगा अजय प्रताप रेप और छेड़खानी जैसे मामलों में पैसा लेकर मामला रफादफा कर देते हैं। सूत्रों के अनुसार दारोगा मुख्यमंत्री और एक कबीना मंत्री को अपना रिश्तेदार बताकर लोगों पर रौब जमाते रहते हैं। अपने निर्धारित रेट लिस्ट के अनुसार  किसी काम को करने पहले पैसा वसूली कर लेता हैं। इन लोगों की मानें तो अजय प्रताप सिंह लॉकडाउन के दौरान क्षेत्र में मछली बाजार लगवाने के एवज में एक दिन का 25 सौ रुपये कारोबारियों से लेते था। आलम यह हो गया है कि कस्बा इंचार्ज  अपना मूल काम छोड़कर अवैध कार्य को कराने में जुट गये हैं। घटना  होने के बाद भी गाली और मारपीट के डर से कोई दारोगा के पास  शिकायत नहीं करने जाता है।