वाराणसी: सरकारी आदेश के 16 दिन बाद भी बच्चों को नहीं मिला सूखा अनाज, ये कैसी व्यवस्था?

वाराणसी: सरकारी आदेश के 16 दिन बाद भी बच्चों को नहीं मिला सूखा अनाज, ये कैसी व्यवस्था?

नवाबगंज की पार्षद सीता देवी ने वॉर्ड के चार विद्यालयों में किया निरीक्षण
प्राधानाचार्य और कोटेदार की लापरवाही भुगत रहे बच्चे

वाराणसी(रणभेरी): सरकार द्वारा प्रदेश के सभी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को मध्यान्ह भोजन के प्रतिपूर्ति के रूप में सूखा अनाज देने का आदेश दिया गया था। जिसके तहत एक जुलाई से उच्च प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को 11 किलो 600 ग्राम सूखा अनाज और प्राथमिक स्कूल के बच्चों को 7 किलो 600 ग्राम अनाज दिया जाना था। लेकिन विद्यालय के प्राधानाचार्य और कोटेदार की लापरवाही की वजह से शहर के नवाबगंज वॉर्ड के चार विद्यालयों के बच्चों को आदेश के तय तिथि के 16 दिन बाद भी सूखा अनाज नहीं मिल पाया है। 

नवाबगंज की पार्षद सीता शर्मा ने इसके लिए वॉर्ड के विद्यालय प्राथमिक विद्यालय दुर्गाकुण्ड-1, प्राथमिक विद्यालय दुर्गाकुंड-2, जूनियर हाईस्कूल नवाबगंज और पीएस नवाबगंज में निरीक्षण किया और वहां के प्रधानाचार्यों से सवाल किया कि अभी तक अनाज क्यों नहीं बंट पाया है। पार्षद के सवाल का जवाब देने के बजाय सभी टालमटोल और आज-कल करते दिखे। कोटेदार अशोक सेठ का कहना है कि जब तक प्रधानाचार्यों द्वारा छात्रों की सूची बनाकर नहीं मिल जाती तब तक मैं अनाज कैसे दे सकता हूं। पार्षद ने बताया कोई प्रधानाचार्य सही जवाब नहीं दे पा रहा है कि राशन क्यों नहीं बंटा। उल्टे जूनियर हाईस्कूल के प्रभारी प्रधानाचार्य अनंत सिंह ने कहा कि जब मन होगा तब बाटेंगे। 

उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि शासनादेश के बाद भी बच्चों को अनाज नहीं मिल पा रहा है। प्रधानाचार्य अपनी मनमर्जी करने पर तुले हैं तो बेसिक शिक्षा विभाग क्या कर रहा है। क्या खंड शिक्षा अधिकारी को यह जानकारी नहीं है कि इन विद्यालयों में आदेश का अवहेलना हो रहा है या वो भी जानबूझ कर आंखों पर पट्टी बांध चुके हैं। कोरोना काल में शासन के आदेश के बाद बच्चों के मन में हर्ष का भाव जगा था कि जब हमारे परिजनों का कामकाज बंद हो चुका है तो विद्यालय से मिलने वाले अनाज से कमसे कम हमारा तो पेट भर ही जाएगा पर विद्यालयों के लापरवाही की वजह से बच्चों की यह आशा भी अब निराशा में तब्दील हो चुकी है।