वाराणसी: 'न इधर जाइये, न उधर जाइये, वक्त की है नजाकत सुधार जाइये', बूंदी परकोटा घाट पर श्रोताओं ने लगाये ठहाके

वाराणसी(रणभेरी): जन जागृति सेवा संस्थान द्वारा आयोजित "पञ्चकवि-चौरासीघाट" कार्यक्रम के अंतर्गत बूंदी परकोटा घाट पर पांचवा कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। जिसमें कवि मनिंद्र कुमार श्रीवास्तव 'फुतीर्ला', वरिष्ठ गजलकार सिद्धनाथ शर्मा 'सिद्ध', संतोष कुमार 'प्रीत', डॉ० विंध्याचल पांडेय 'सगुन' व प्रसन्नवदन चतुवेर्दी ने काव्य पाठ किया। 

सिद्धनाथ शर्मा जी ने "न इधर जाइये, न उधर जाइये, वक्त की है नजाकत सुधार जाइये", फुतीर्ला जी ने "गंगोत्री का अविदान लिए, निर्मल द्बारा का वरदान लिए मंदाकिनी तू मुक्तदायिनी तू तू ही काली हो अम्बे सच्चे मन से करता हूं तेरा वंदन  हे माँ गंगा" संतोष कुमार प्रीत जी ने "हस्ते हस्ते दर्द को सहते आंसू पीना बड़ा कठिन है, जीवन जीना बड़ा कठिन है।" डॉ० विंध्याचल पांडेय 'सगुन' जी ने "नाग नथैया कर दे भैया नाग नथैया कर, नाच नचा दे ताकि धिना धिन ताता थैया पर", प्रसन्न वदन चतुवेर्दी जी ने "इस गए साल ने हमसे ऐसा किया, कुछ बुरा कर गया कुछ तो अच्छा किया" आदि रचनाओ से उपस्थित श्रोताओ का मन मोह लिया। 

कार्यक्रम के प्रारंम्भ में जागृति स्मृति ने गणेश वंदना व माँ सर्वस्वती वंदना प्रस्तुतु किया। कार्यक्रम में प्रकाशनाथ योगेश्वर जी अजीत कुमार पाठक, अरुण कुमार पाठक एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रसन्नवदन चतुवेर्दी तथा धन्यवाद ज्ञापन संतोष कुमार प्रीत जी ने किया।