वाराणसी: ध्यानोत्सव में बताया प्रार्थना माँगना नही, अपने रचयिता के साथ जुड़ना तथा लय होना है 

वाराणसी: ध्यानोत्सव में बताया प्रार्थना माँगना नही, अपने रचयिता के साथ जुड़ना तथा लय होना है 

वाराणसी(रणभेरी): सारनाथ लय योग आश्रम में ध्यानोत्सव के तीसरे और अन्तिम दिन में प्रार्थना सत्र का आयोजन हुआ। इस सत्र में हार्टफुलनेस प्रशिक्षको ने बताया कि प्रार्थना कुछ माँगना नही वरन अपने रचयिता के साथ जुड़ना तथा उसमें लय होना है। प्रार्थना विषम परिस्थितियों से उबरने का एकमात्र साधन है। कार्यक्रम में भारी संख्या में लोग सम्मलित हुए।

हार्टफुलनेस संस्थान एक वैश्विक संस्थान है जिसके ग्लोबल गाईड डॉ कमलेश डी. पटेल जिन्हें प्रेम से दाजी कहते है। ध्यान प्रारम्भ करने हेतु न्यूनतम 15 वर्ष की आयु होनी चाहिए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. दुर्ग सिंह चौहान पूर्व कुलपति उत्तर प्रदेश टेक्निकल विश्वविद्यालय रहे। उन्होंने इस अवसर पर ध्यान के महत्त्व के बारे में वर्णन करते हुए सभी इस ध्यान पद्धति को अपनाने का सुझाव दिया।

इस अवसर पर सभी ने आनंद का अनुभव किया। कार्यक्रम में भारी संख्या में महिला,पुरुष,बुजुर्ग,युवा और संस्थान के अभ्यासी तथा प्रशिक्षक उपस्तिथ रहे। वातावरण बहुत खुशनुमा और प्रेमपूर्ण रहा।