वाराणसी: बीएचयू चीफ प्रॉक्टर ने किया मेरा उत्पीड़न, महिला गार्ड ने लगाया आरोप

वाराणसी: बीएचयू चीफ प्रॉक्टर ने किया मेरा उत्पीड़न, महिला गार्ड ने लगाया आरोप

दस महीने से अधिकारियों और मंत्रियों के चौखट पर दौड़ने के बाद भी महिला निशानेबाज को नहीं मिल रहा न्याय
चीफ प्रॉक्टर और प्रशासन पर आरोप, पहले किया उत्पीड़न, बाद में आवाज उठाई तो नौकरी से किया बेदखल

वाराणसी (रणभेरी): कहा जाता है न कि आज आपके पास अगर पहुंच और पैसा नहीं है तो आपको शायद ही न्याय मिल पाए। अधिकारियों, मंत्रियों और जिम्मेदारों की चौखट पर आप नाक रगड़ते-रगड़ते थक जाएंगे पर सिवाय आश्वासन के आपको वहां से कुछ नहीं मिलने वाला और यह न्यायायिक प्रक्रिया तब और जटिल हो जाती है, जब आप किसी बड़े संस्थान या पहुंच वाले व्यक्ति के कारनामों का पर्दाफाश करने की कोशिश करते हैं। ऐसा ही हो रहा है बीएचयू की पूर्व छात्रा, राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुकी प्रतिभावान महिला निशानेबाज और बीएचयू की पूर्व गार्ड अनिशा चटर्जी के साथ। 

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अनिशा का आरोप है कि बीएचयू प्रॉक्टोरियल बोर्ड के कुछ अधिकारियों और खुद चीफ प्रॉक्टर प्रो. ओपी राय द्वारा उनका उत्पीड़न किया गया है। चीफ प्रॉक्टर की धमकी वाली रिकार्डिंग भी वायरल हो चुकी है जिसमें उन्होंने साफ-साफ कहा है कि तुमको जहां जाना है जाओ, जो करना है कर लो या तो मैं यहां रहूंगा या तुम। इस प्रतिभावान निशानेबाज महिला का दोष बस इतना था कि इसने प्रॉक्टोरियल बोर्ड में चल रहे भ्रष्टाचार में साथ नहीं दिया। अधिकारियों की जेब गर्म नहीं की। जिसके चलते इसको मासिक धर्म आने के बाद एक दिन ऑफिस न आने से सबसे सामने बेइज्जत किया गया। इसने बड़े अधिकारियों तक आवाज उठाई तो इसे बिना कारण जबरन नौकरी से बेदखल कर दिया गया। अनिशा चटर्जी ने अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई। दर्जनों बार बीएचयू कुलपति से समेत अन्य अधिकारियों को पत्र लिखे, मुलाकात की, फोन से बात की। 

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राज्यमंत्री नीलकंठ तिवारी ने भी नहीं सुनी गुहार:

पीड़िता का कहना है कि सूबे के राज्यमंत्री नीलकंठ तिवारी से कई बार मिलकर न्याय की गुहार लगाई पर हुआ कुछ नहीं। बीएचयू प्रशासन अब भी गूंगा बहरा बना हुआ है। मामले को लेकर जब ट्वीट किया गया तो एडीजी और आईजी के ट्वीटर अकाउंट से लंका थानाध्यक्ष को जांच करने का आदेश दिया गया पर जांच क्या मामले में न तो कोई कार्रवाई हुई और न ही दोषियों से कोई पूछताछ। देश के प्रधानमंत्री महिला अधिकारों की बात करते हैं और उनके ही संसदीय क्षेत्र में एक महिला को न्याय नहीं मिल पा रहा है, इससे शर्मनाक भला और क्या हो सकता है।