वाराणसी: केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट फेडरेशन के प्रदेश महामंत्री पर करोड़ों के गबन का आरोप, मचा हड़कंप

वाराणसी: केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट फेडरेशन के प्रदेश महामंत्री पर करोड़ों के गबन का आरोप, मचा हड़कंप

भेलूपुर के एक होटल में आयोजित प्रेसवार्ता में प्रदेश संगठन मंत्री सुधीर अग्रवाल ने लगाए गंभीर आरोप
कहा, फर्जी बिल बनाकर कई सालों से करोड़ो रुपये का हेरफेर कर चुके हैं महामंत्री सुरेश गुप्ता

वाराणसी(रणभेरी): सीडीएफ यूपी के प्रदेश संगठन मंत्री सुधीर अग्रवाल ने भेलुपूर के एक होटल में प्रेसवार्ता के दौरान अपने सहयोगियों के साथ केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट फेडरेशन यूपी के प्रदेश महामंत्री सुरेश गुप्ता पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने संस्था में सुरेश गुप्ता द्वारा लंबे समय से किए जा रहे घोटाला की कलई खोली। बताया कि जो संस्था के नाम पर पैसा आता है उसके फर्जी बिल बनवाकर पिछले कई सालों से संस्था में सुरेश करोड़ों रुपए का हेरफेर कर चुके हैं। इस खुलासे के बाद से दवा व्यवसायियों में हड़कंप मचा हुआ है।

प्रदेश संगठन मंत्री सुधीर अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश महामंत्री सुरेश गुप्ता के खिलाफ गाजियाबाद के थाने में 420 धारा में मुकदमा चल रहा है। फिलहाल सुरेश गुप्ता जमानत पर बाहर है। उनके इस कृत्य से दवा व्यवसाई व दवा कंपनियों में दहशत है। जिसके कारण संस्था के पुराने व निष्ठावान दवा व्यापारी धीरे-धीरे संस्था से किनारा कर रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि सीडीएफ यूपी संस्था के करोड़ों रुपए के गबन से सभी पदाधिकारियों में रोष है और जब पदाधिकारियों ने उनसे संस्था का लेखा-जोखा मांगा तो उन्होंने अभद्र भाषा का प्रयोग कर उसे देने से इनकार कर दिया। 

पहले से विवादों में रहे हैं सुरेश गुप्ता
सुधीर अग्रवाल ने बताया कि सुरेश गुप्ता पूर्व में भी विवादों मे रहे है जो भी इनके खिलाफ चुनाव लड़ता है उसे संस्था से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। सीडीएफ यूपी संस्था को मान्यता देने वाली राष्ट्रीय संस्था एआईओसीडी के अध्यक्ष जगन्नाथ शिंदे ने पूर्व में भी सुरेश गुप्ता से संस्था का लेखा-जोखा मांगा था उस पर भी अब तक कोई जवाब नहीं दिया गया है। जिससे एआईओसीडी संस्था ने भी सीडीएफ यूपी से किनारा करने का मन बना लिया है। बताया कि उन्हें संगठन से हटाने की मांग की गई है और इस पूरे प्रकरण को लेकर 12 जनवरी को वाराणसी में सीडीएफ यूपी के तमाम पदाधिकारियों के साथ बैठक होने जा रही है जिसमें सुरेश गुप्ता को सर्व सहमति से संस्था से निष्कासित भी किया जा सकता है।