सोने के खजाने के बीच छिपा है सोनभद्र का काला सच, पल-पल घुटकर मर रहें दस हजार लोग

सोने के खजाने के बीच छिपा है सोनभद्र का काला सच, पल-पल घुटकर मर रहें दस हजार लोग

सोनभद्र/वाराणसी: यूपी के सोनभद्र जिले में सोने का खजाना मिलने की खबर के बाद यह जिला सूर्खियों में आ गया। खबर फैली कि सोनभद्र में 3000 टन सोने का भंडार मिला है। सोने के विशाल भंडार की खबर चारों ओर आग की ओर फैल गई, देश और दुनिया के लोगों की निगाहें सोनभद्र पर आकर टिक गई। हालांकि बाद में इस विशाल सोने की भंडार की खबर का खंडन कर दिया गया।

सोने की चमक में खो गए लोग:

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने बताया कि प्रदेश के सोनभद्र में करीब 3,000 टन सोने का कोई स्वर्ण भंडार नहीं मिला है। लोग अब भी इस पर विश्वास नहीं कर रहे हैं। सोने के खजाने के बीच इस जगह का एक काला सच है, जिसपर किसी की निगाह नहीं गई। लोग सोने की चमक में खो गए, लेकिन यहां रहने वाले लोगों के उस कष्ट को जानने तक कि कोशिश नहीं की, जिसकी वजह से सोनभद्र के 10 हजार लोग प्रभावित हो चुके हैं।

सोनभद्र का काला सच और काला रोग: सोने का खजाना मिलने की खबर तो सबने पढ़ी और उत्सुकता दिखाई, लेकिन वहां वायु और जल प्रदूषण प्रभावित 10,000 लोगों की उस बीमारी को अनदेखा कर दिया, जिसकी वजह से वहां से लोग विकलांग हो रहे हैं। सोनभद्र के 269 गांव के लगभग 10,000 ग्रामीण फ्लोरोसिस बीमारी से ग्रस्त होकर अपंग हो गए हैं। 60 फीसदी आदिवासी जनसंख्या वाले सोनभद्र के 269 गांवों के 10,000 लोग खराब हवा और दूषित पानी की वजह से फ्लोरोसिस नामक बीमारी से ग्रस्त हो गए हैं। 

नाले और पोखरे का गंदा पानी पीने को मजबूर:

आदिवासियों के लिए काम करने वाली एनजीओ का कहना है कि सरकार यहां की खनिज संपदा का दोहन कर राजस्व अर्जित करती है। खनन माफिया यहां प्रबल है, लेकिन यहां के लोगों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। यहां के लोग आज भी नाले का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। जिसकी वजह से लोगों में ये फ्लोरोसिस की बीमारी हो रही है। लोग विकलांग हो रहे हैं। बच्चों में तेजी से ये बीमारी बढ़ रही है। उनका मानसिक और शारीरिक विकास प्रभावित हो रहा है, लेकिन सरकार अब तक नहीं जागी।