पाप की कमाई का काला सूत्रधार, परिवहन विभाग को बनाया कारोबार!

पाप की कमाई का काला सूत्रधार, परिवहन विभाग को बनाया कारोबार!

सिपाही पंकज सिंह ने ओवरलोडिंग सिस्टम इंट्री से बनाई अकूत सम्पत्ति 

वाराणसी/जौनपुर(रणभेरी): सामान्य वेतन, असामान्य कदाचार पाप की कमाई से बनाया सम्पत्ति अपार! जी हां, सरकार भ्रष्टाचार पर भले ही कितनी भी सख्त होने का दावा करती आ रही हो मगर वह दावा तब महज एक कोरा छलावा साबित हो जाता है। जब एक सरकारी कर्मी साल दर साल भ्रष्टाचार से अकूत चल अचल संपत्ति बनाता जाय और भ्रष्टाचार में उसका नाम आए यहां तक उसके खिलाफ मुकदमा पंजीकृत होने के बाद भी वह बेखौफ होकर काली कमाई का कारोबार अनवरत करता ही जाय। हम बात कर रहे हैं एक ऐसे सरकारी कर्मी की जो परिवहन विभाग में तो सिपाही के पद पर है मगर उसकी सम्पत्ति रहन सहन ठाट ऐसे की मोटा वेतन पाने वाले अफसर को वह फेल कर दे।

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नाम है उसका पंकज सिंह जो परिवहन विभाग के जौनपुर जनपद में वर्तमान में तैनात है और माल वाहनों के ओवरलोडिंग इंट्री कोड का सरगना है, जिसने नियुक्ति से लेकर अब तक विभाग को छलने छलते छलनी कर दिया। अब इसके अवैध कमाई का भांडा फूटा तो जो जानकारी छन कर आ रही हैं उसके अनुसार यह कई नामी बेनामी सम्पत्ति का स्वत: या पारिवारिक सदस्यों के नाम खड़ा किया है।

बंगला गाड़ी, झुमके, कंगना, इन सबसे भरा पंकज परिवार का अंगना:

सिपाही पंकज सिंह का एक मकान भोजूबीर महावीर रोड पर है। जो विलासिता और भव्यता में किसी पूंजीपति के मकान से कम प्रतीत नहीं होता। तीन मंजिला मकान में लिफ्ट से लगायत वह हर चीज इस मकान में मौजूद है जो बड़े कोठी बंगलो में रहनी चाहिए। साथ ही कई लग्जरी वाहन भी पंकज के पास हैं। गावँ पर पंकज द्वारा एक स्कूल भी खोले जाने का मामला संज्ञान में आया है। परिवार में महंगे गहनों की कोई कमी नहीं है। और पूर्णत:रहन सहन में राजशाही हावी है। ऐसा इसलिए क्योंकि इंट्री कोड से हर माह लाखों की काली कमाई अगर आ रही है तो खर्च में राजशाही दिखेगी ही।

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डेढ़ दशक पहले परिवहन विभाग में आया न्यूतम वेतन से कैसे अचल संपत्ति बनाया?

आज से चौदह वर्ष पूर्व 2006 में पंकज सिंह की नियुक्ति परिवहन विभाग में सिपाही के पद पर हुई प्रथम नियुक्ति सोनभद्र में हुई। जहां रहते हुए पंकज ने ओवरलोडिंग का खेल जमकर खेला था। 2006 में समूह ग की भर्ती में वेतन 5700 से शुरू हुई थी । 2009 तक प्रतिवर्ष इंक्रीमेंट से बढ़कर लगभग 8000 तक हुई थी। 6वां वेतन लगने के बाद तब 17000 के लगभग हो गया। प्रतिवर्ष प्रतिवर्ष इंक्रीमेंट 8 से 10 प्रतिशत बढ़ता है। लिहाजा कुल मिलाकर अब तक लगभग 32 लाख रुपये पंकज को मिले होंगे। मगर वर्तमान में सम्पत्ति भाई मत पूछिए यह तो परिवहन विभाग के उच्चाधिकारी या आर्थिक अपराध शाखा ही पूछ सकता है।

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क्या कहता है कर्मचारी आचरण नियमावली?

राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली में स्पष्ट उल्लेख है कि सरकारी कर्मचारी प्रथम नियुक्ति के बाद हर पांच साल बाद नियुक्ति करने वाले प्राधिकारी के समक्ष अपनी चल अचल संपत्ति की घोषणा करेगा। जिसका वह स्वयं स्वामी हो या उसके परिवार के सदस्यों पत्नी पुत्री पुत्र के नाम हो। मगर यह सम्भव से परे प्रतीत होता है कि पंकज सिंह ने अपनी सम्पत्ति का ब्यौरा अपनी नियुक्ति प्राधिकारी के समक्ष उपलब्ध कराया होगा क्योंकि आय से अधिक सम्पत्ति का ब्यौरा भला कौन कर्मी देना चाहेगा कि विभाग की भृकुटि टेढ़ी हो जाय।