बोलें बनारसी- बेरहम हुई तुम्हारी सरकार, पब्लिक के पेट पर करती प्रहार

बोलें बनारसी- बेरहम हुई तुम्हारी सरकार, पब्लिक के पेट पर करती प्रहार

बनारस के लोगों ने कहा, गड़बड़ीओं का खजाना है स्मार्ट मीटर, इससे नहीं है कोई लाभ
संवदेनहीनता के हद तक पहुंची सरकार, लोगों पर लगातार बनाया जा रहा दबाव

'बिजली का झटका'

वाराणसी(रणभेरी): कोरोना काल में दहशत के साथ लोगों का सारा कारोबार चौपट हो गया। अनलॉक में दुकानें खुलीं भी तो अभी तक उसे चलाने में समय लग रहा है ऐसे समय में पूरे लॉकडाउन का बिजली बिल आना लोगों के सिर पर मुसीबतों का पहाड़ टूटने से कम नहीं है। रणभेरी से बातचीत में बनारस के लोगों ने कहा कि स्मार्ट मीटर लूट का औजार बन चुका है जो सीधे जनता के पेट पर करारा प्रहार कर रहा है पर सरकार बेरहम हो चुकी है। उसे जनता के दुख दर्द, समस्या-दिक्कत से कोई लेना-देना नहीं है। स्मार्ट मीटर लगना सही है पर इससे बिल दोगुना से तीन गुना आ रहा है वह चिंता का विषय है।

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लॉकडाउन में स्थिति खराब हो गई ऊपर से बिजली बिल का बोझ लाद दिया गया है, समझ नहीं आ रहा कि इसे कहां से चुकाएंगे। बिजली विभाग के कर्मचारी और अधिकारी रोजाना ही दबाव बनाते हैं और बिल न जमा करने पर कनेक्शन काटने की धमकी देते हैं। यह तो संवेदनहीनता की हद है। स्मार्ट मीटर गड़बड़ी का खजाना बन चुका है। स्मार्ट मीटर लगाकर जनता को लूटा जा रहा है। योगी सरकार केवल अमीरों की हितैषी है गरीबों के लिए उसके पास कुछ नहीं उल्टे बिजली बिल लादकर उसकी कमर तोड़ने का काम किया जा रहा है।

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बनारस के लोगों ने कहा कि स्मार्ट मीटर में पैसे की बहुत ही ज्यादा चोरी हो रही है। जब नहीं तब जैसे तैसे मनमाना बिल आ जाता है। लोगों का समझ नहीं आता कि इतना बिल आया तो आया कहां से। दिल्ली सरकार से यूपी सरकार को सीखना चाहिए। दिल्ली के तरह यूपी की सरकार भी लोगों को बिजली बिल में राहत देनी चाहिए कमसे कम दो सौ यूनिट बिजली बिल माफ करनी चाहिए। सरकार लागातार आधुनिक होने का दावा कर रही है पर बिजली विभाग अब भी अप टू डेट नहीं है। आज भी लाइन लगकर बिजली बिल जमा करना पड़ता है। ऑनलाइन जमा किए तो 15 दिन बार अप टू डेट होता है। बिजली कटौती भी खूब हो रही है पर बिजली बिल बढने के बजाय घटने का नाम नहीं ले रहा है। लोगों ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान काम-धंधे पूरी तरह से बंद रहे।

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बिजली की खपत कुछ नहीं हुई पर लॉकडाउन के बाद बिजली बिल उतनी ही आई। जिसका छोटा सा व्यापार था वह लॉकडाउन के बाद भी उसे चलाने के लिए जूझ रहा है ऊपर से बिजली बिल उसके सिर में दर्द दे रहा है। इस आफत के समय में समझ नहीं आ रहा कि बिजली बिल भरें की परिवार का खर्चा चलाएं। गरीब और मध्यम वर्ग इस समय बड़ी मुश्किलों का सामना कर रहा है। स्मार्ट मीटर में कभी कोई लाभ नहीं समझ आता केवल हानि ही हानि होती है। 

विजयानगरम निवासी मुन्ना शुक्ला कहते हैं कि कोरोना के संक्रमण के कारण नगर में हुए लॉकडाउन में हमलोग खाये बिना मर रहे है, ऊपर से बिजली विभाग स्मार्ट मीटर लगाकर जबरन हमलोगों से पैसा वसूल रही है। हमलोग अपने परिवार को पेट पाले या बिजली बिल जमा करे, कुछ समझ में नहीं आ रहा है। सरकार को भी कुछ इस पर विचार करना चाहिए।

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कैंट निवासी रोहित शर्मा ने कहा कि लॉकडाउन के कारण रोजगार पूरी तरह से चौपट हो गया है। ऊपर से स्मार्ट मीटर के कारण बिजली का बिल कई गुना बढ़कर आ रहा है। स्मार्ट मीटर में रीडिंग बहुत तेजी से भाग रहा है। बिजली विभाग को स्मार्ट मीटर की खामियों को दूर कर जनता की परेशानियों को दूर करना चाहिए और प्रदेश सरकार को बिजली बिल में कुछ छूट देनी चाहिए। 

अखरी निवासी कृष्णकांत का कहना है कि अचानक बिजली बिल कई गुना अधिक आने से जनता काफी परेशान है। कोरोना संक्रमण के कारण सबकी आर्थिक स्थिति बहुत ही खराब है, ऐसे समय में प्रदेश सरकार को बिजली बिल में कुछ छूट देनी चाहिए। बिजली विभाग को भी उपभोक्ता के हितों का भी ध्यान रखना चाहिए। रोजगार धंधा इस समय पूरी तरह से बंद है इसको देखते हुए सरकार को निर्णय लेना चाहिए।

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विन्दभूषण मिश्रा कहते हैं कि स्मार्ट मीटर से जनता का शोषण किया जा रहा है। पहले बिल जहां चार से पांच सौ के बीच आता था, आज वहीं स्मार्ट मीटर में वही बिल दो से चार हजार के बीच में आ रहा है। सरकार द्वारा कहा गया कि स्मार्ट मीटर व घरों में एलईडी बल्ब लगाने से बिजली बिल बहुत कम आयेगा लेकिन हो रहा है, ठीक उल्टा आज बिजली बिल बेतहाशा आ रहा है। जिसको लेकर जनता बहुत ही परेशान है।

विरदोपुर निवासी रमेश कुमार कहते हैं कि स्मार्ट लगाने का हमलोग विरोध नहीं कर रहे है हमलोगो की यह मांग है कि इस मीटर की वजह से बिल बहुत आ रहा है, इसे बिजली विभाग ठीक करे। लॉकडाउन में काम काज पूरी तरह से बंद है उपर से हजारों रूपये का बिल हमलोग कैसे जमा करेंगे। दिल्ली की तरह उत्तर प्रदेश सरकार भी जनता को बिजली में कुछ छूट दे जिससे वह चैन की सांस ले सके।