बोलें बनारसी- बिजली के रूप में जल रहा गरीबों का कलेजा, गरीबों से वसूली पर उतारू है सरकार

बोलें बनारसी- बिजली के रूप में जल रहा गरीबों का कलेजा, गरीबों से वसूली पर उतारू है सरकार

बनारस के लोगों ने कहा, जिसके पास इस समय खाने को अन्न नहीं वह भला कहां से जमा करेगा बिजली बिल  

'बिजली का झटका'

वाराणसी(रणभेरी): कोरोना काल की वजह से पिछले पांच महीने से बंद रोजगार धंधो और काम से आम जनता की आर्थिक स्थिति दयनीय हो चुकी है। लेकिन ऐसे विपरित समय में लोगों को राहत देने के बजाय सरकार बिजली बिल के नाम पर इन लाचार लोगों पर प्रहार कर रही है।

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रणभेरी से बातचीत में बनारस के लोगों ने कहा कि बेतहासा बिजली बिल को देखकर तो ऐसा लग रहा है कि एक गरीब के झोपड़ी में बिजली का बल्ब नहीं उसका कलेजा जल रहा है। जिसके पास खाने तक को नहीं है वह भला सात से आठ प्रति यूनिट का बिजली बिल कहां से जमा करेगा। कहा कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद कुछ लोगों को बिजली का बिल जमा करने में दिक्कत होती है। अगर रीडिंग के जरीये अगर बिजली बिल आए तो जनता का सहूलियत होगी और उसे परेशान नहीं होना पड़ेगा। रीडिंग के बिजली बिल आने के बाद लोगों को पता भी चलेगा कि उनका कितना बिजली खर्च हो रहा है। रीडिंग बिल आने पर वे बचत कर सकते हैं।

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वैसे भी लॉकडाउन में बिजली बिल को लेकर लोग काफी परेशान हैं। कई लोग घर छोड़कर कहीं बाहर भी चले जाते हैं फिर भी उनका मीटर पहले की तरह ही चलता रहता है। लोग परेशान होते हैं ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह रीडिंग से बिजली बिल भेजे न कि मोबाइल या किसी एप पर। लोगों ने कहा कि इस समय हर तरफ समस्याएं ही समस्याएं हैं। समझ नहीं आ रहा है कि कहां से पैसे आएंगे और लोग खर्चा चला पाएंगे। ऊपर से परेशानियों की तरह बिजली बिल भी आ चुका है। जिसका कोई निर्धारण नहीं हैं। जैसे तैसे अनाप-शनाप आ रहे बिजली बिल का कहर झेलते-झेलते जनता अजीज आ चुकी है। रोज कमाने खाने वाला बिजली का बिल नहीं दे पा रहा है। मंहगाई भी बढ़ चुकी है, लोग इस समय परिवार ही नहीं चला पा रहे हैं तो भला बिजली बिल कहां से भरेंगे।

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सरकार को जनता के दर्द को समझना चाहिए और बिजली के दामों में कमी के साथ-साथ स्मार्ट मीटर को ठीक करे। मीटर का संधोशन होना चाहिए तभी जनता को राहत मिलेगी। लॉकडाउन के दौरान की बिजली बिल तो निश्चित ही माफ कर देना चाहिए। लोगों ने कहा कि बिजली बिल की बेतहासा वृद्धि से अब जीना मुहाल हो गया है। कोरोना काल में जनता पहले से ही मंहगाई और दिक्कतों की मार झेल रही है ऊपर से बिजली बिल का भार वह कहां से झेल पाएगी। एक गरीब जिसका झोपड़ी है अगर उसके झोपड़ी में एक बल्ब भी जल रहा है तो समझिए उसका कलेजा जल रहा है। क्योंकि बिजली के एक यूनिट का चार्ज सात से आठ रूपया कर दिया गया है। ऐसे में भला वह गरीब आदमी अपना पेट पाले की बिजली का बिल जमा करे।

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बिजली बिल के बढ़ोतरी से गरीब और मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा परेशान हैं। स्मार्ट मीटर जनता से पैसा वसूलने का माध्यम बन चुके हैं। सरकार की मंशा है कि जनता से ज्यादा से ज्यादा पैसा कैसे वसूला जाए। बिजली जलाने वाला एक अमीर, एक गरीब सभी को एक ही रेट से बिजली बिल जमा करना पड़ता है। यह कहां का न्याय है। मठ, मंदिरों को बिजली बिल से मुक्त करना चाहिए।  फोटो-बिजली

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समाजसेविका सुषमा गुप्ता कहती हैं कि घर की पूरी लाइट बंद होने के बाद भी स्मार्ट मीटर चालू रहता है और रीडिंग चालू रहता है जिसके कारण बिजली बिल बहुत आ रहा है। प्रदेश सरकार और बिजली विभाग को इस पर विचार करना चाहिए कि लॉकडाउन में रोजगार धंधा बंद होने के कारण आम जनता अपना परिवार नहीं चला पा रहा है तो वह बिजली बिल कहां से देगा इसलिए सरकार को कुछ दिनों के लिए राहत देनी चाहिए।

चंदुआ छित्तूपुर निवासी गौअतम सोनकर ने कहा कि पुराने मीटर में बिजली बिल जितना यूज करते थे उतना ही आता है था लेकिन जबसे घरों में स्मार्ट मीटर लगा है बिजली का बिल कई गुना बढ़कर आ रहा है। बिल अधिक आने से उपभोक्ता काफी परेशान है। वह यह नहीं समझ पा रहे है कि हम जब बिजली कम उपभोग कर रहे है तो इतना अधिक बिल कहां से आ जा रहा है। सरकार को इसपर विचार करके स्मार्ट मीटर में आ रहे तकनीकी गड़बड़ी को दूर करना होगा।

समाजसेवी विजय का कहना है कि घरों में जबसे चाइना कंपनी द्वारा स्माट मीटर लगाया गया है बिल बहुत अधिक आ रहा है। बिजली बिल अधिक आने से घर का बजट गड़बड़ा गया है। परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है बिजली बिल कहां से जमा करे। प्रदेश सरकार को दिल्ली सरकार की तरह दो सौ यूनिट बिजली बिल नि:शुल्क कर देना चाहिए। 

समाजसेवी आरती पाण्डेय कहती हैं कि लॉकडाउन में पांच महीना तक रोजगार धंधा पूरी तरह से बंद था, जिसके कारण घरों की माली हालत खराब हो गयी है, उपर से स्मार्ट मीटर की वजह बिजली बिल बेतहाशा आ रहा है। सरकार व बिजली विभाग को लॉकडाउन के  समय वाले बिजली बिल को माफ कर देना चाहिए अगर नहीं माफ कर सके तो कुछ छूट देनाी चाहिए ताकि आम जनता को इससे परेशानी न हो।

देवरहवा बाबा आश्रम के स्वामी राम अभिलाष दास महाराज ने कहा कि पहले आश्रम का बिजली बिल एक महीने का पांच हजार रूपया आता था, लेकिन जबसे स्मार्ट मीटर लग गया है दस हजार रूपया महीना बिजली बिल आता है। मठ में साधु  संत रहते है बिजली का उपभोग भी बहुत अधिक नहीं करते  है उसके बावजूद इतना अधिक बिजली बिल आना  समझ में नहीं आ रहा है। सरकार व बिजली  विभाग को इस पर विचार करना चाहिए कि आखिककार स्मार्ट मीटर से क्यों इतना अधिक बिल आ रहा है।

दुर्गाकुण्ड निवासी डॉ. अरविन्द त्रिपाठी कहते हैं कि बेतहाशा बिजली का बिल आने से आम जनता को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लॉकडाउन की वजह से पहले से ही घरों की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गयी है। उपर से बिजली विभाग द्वारा मनमानी बिजली भेज कर उसको जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है। कहीं कहीं तो विभाग द्वारा घरों की लाइट ही काट दी जा रही है। बिजली विभाग को अपने उपभोक्ताओं को थोड़ा राहत देना चाहिए, जिससे वह आसानी से बिजली बिल जमा कर सके।