सारंग थत्ते का ब्लॉग: हिंद महासागर में दबाव बनाता चीन

सारंग थत्ते का ब्लॉग: हिंद महासागर में दबाव बनाता चीन

चीन की नौसेना की ताकत का सही आकलन करने के लिए हमें 2017 को देखना होगा. हॉर्न ऑफ अफ्रीका के मुहाने अदन की खाड़ी में जिबूती में चीन ने अपना लंगर डालकर पूरे विश्व में अपनी भविष्य की योजनाओं को अमलीजामा पहनाया था. 11 जुलाई 2017 को चीन ने अपने जहाज अफ्रीका के लिए भेजे थे. 

आधिकारिक तौर पर इस सैन्य ठिकाने का उपयोग करने की घोषणा 1 अगस्त 2017 को की गई थी. उस समय इस इलाके में अमेरिका, जापान और फ्रांस के सैन्य बल पहले से मौजूद थे. अब चीन ने इस दौड़ में शामिल होने का मन बनाया. इसके चलते चीन से अफ्रीका तक चीन के नौसेना के जहाज और पनडुब्बियां लगातार हिंद महासागर में नजर आती रही हैं. इस सैन्य बेस का मकसद था अदन की खाड़ी से गुजरने वाले चीनी वाणिज्यिक तेल वाहक टैंकरों की हिफाजत करना.

अमेरिका के पैसिफिक बेड़े के प्रमुख एडमिरल जॉन एक्विलीनो, जो पिछले महीने भारत के दौरे पर आए थे, ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि हमें कोई अचरज नहीं होना चाहिए यदि आने वाले साल में विश्व को धमकाने के लिए चीन अपने पहले विमान वाहक पोत को हिंद महासागर में तैनात करे. दक्षिण चीनी समुद्र में चीन की बढ़ती हुई पैठ से भी इस इलाके के सभी देशों को खतरा हो सकता है. 

चीन ने श्रीलंका में हंबनटोटा में 99 वर्ष की लीज पर बंदरगाह की जमीन ली है. अक्तूबर 2018 में चीनी पनडुब्बी को सुंडा की खाड़ी को पार कर हिंद महासागर में आते हुए देखा गया था. श्रीलंका में कुछ दिन बिताने और रखरखाव करने के बाद यह वापस चीन की तरफ चली गई थी. हमारे बोइंग पी8आई हवाई जहाज, जो पनडुब्बी की खोज में माहिर है, इस इलाके  में गश्त लगाते रहते हैं. 

भारत सरकार हिंद महासागर में मौजूद अन्य देशों से जानकारी का आदान-प्रदान भी करती रही है. भारतीय नौसेना के अनुसार चीनी नौसेना के छह से आठ जहाज, जिसमें पनडुब्बियां भी शामिल हैं, हर वक्त हिंद महासागर में नजर आते रहे हैं. हमें हर समय चौकस रहना ही होगा.