श्रमिकों से किराया वसूलने के आरोप पर रेलवे ने दिया जवाब, कहा- हम नहीं बेच रहे हैं कोई टिकट

श्रमिकों से किराया वसूलने के आरोप पर रेलवे ने दिया जवाब, कहा- हम नहीं बेच रहे हैं कोई टिकट

नई दिल्ली: लॉकडाउन में फंसे प्रवासीय मजदूरों को उनके घर पहुंचाने के लिए विशेष ट्रेनें चलाई जा रही हैं। इस बीच रेलवे पर कई विपक्षी पार्टियों ने श्रमिकों से किराया वसूलने का आरोप भी लगाया है। इसपर अब रेलवे का जवाब आ गया है। समाचार एजेंसी एएनआई ने रेल मंत्रालय के सूत्र के हवाले से कहा है कि 'रेलवे राज्य सरकारों से इस वर्ग के लिए केवल मानक किराया वसूल रहा है, जो रेलवे द्वारा ली जाने वाली कुल लागत का महज 15% है।'

सूत्र ने कहा है, 'रेलवे प्रवासियों को कोई टिकट नहीं बेच रहा है और केवल राज्यों द्वारा प्रदान की गई सूचियों के आधार पर यात्रियों को यात्रा करवा रहा है। भारतीय रेलवे सामाजिक दूरी को बनाए रखने के लिए प्रत्येक कोच में बर्थ खाली रखते हुए श्रमिक विशेष ट्रेनें चला रहा है। ट्रेनें गंतव्य स्थान से खाली लौट रही हैं। रेल मंत्रालय द्वारा प्रवासियों को मुफ्त भोजन और बोतलबंद पानी दिया जा रहा है।' 

रेल मंत्रालय के सूत्र ने कहा, 'रेलवे ने देश के विभिन्न हिस्सों से अब तक 34 श्रमिक विशेष ट्रेनें चलाई हैं। संकट के समय में विशेष रूप से गरीब से गरीब लोगों को भी सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा प्रदान करने की अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को पूरा कर रही है।' 

इस मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ट्वीट करते हुए कहा था, 'एक तरफ रेलवे दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों से टिकट का भाड़ा वसूल रही है, वहीं दूसरी तरफ रेल मंत्रालय पीएम केयर फंड में 151 करोड़ रुपए का चंदा दे रहा है। जरा ये गुत्थी सुलझाइए!' राहुल गांधी ने अपने इस ट्वीट में भारतीय रेलवे की तरफ से पीएम केयर्स फंड में 151 करोड़ रुपए चंदा देने की खबर का स्क्रीन शॉट भी शेयर किया था। 

वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने इस मामले पर ट्वीट करते हुए कहा था, 'ट्रेन से वापस घर ले जाए जा रहे गरीब, बेबस मजदूरों से भाजपा सरकार द्वारा पैसे लिए जाने की खबर बेहद शर्मनाक है। आज साफ हो गया है कि पूंजीपतियों का अरबों माफ करने वाली भाजपा अमीरों के साथ है और गरीबों के खिलाफ। विपत्ति के समय शोषण करना सूदखोरों का काम होता है, सरकार का नहीं।'