बनारस से एमपी तक शोर, आखिर चौकीदार ही निकला चोर!

बनारस से एमपी तक शोर, आखिर चौकीदार ही निकला चोर!

बीजेपी काशी विश्वनाथ मंडल के उपाध्यक्ष पर करोड़ो रुपये के सोने की जालसाजी का आरोप
बनारस पहुंची थी मध्य प्रदेश पुलिस, भाजपा से जुड़े और खुद को चौकीदार कहने वाले ने ज्वेलरी फर्म में फर्जीगिरी कर हड़पा पांच किलो सोना

वाराणसी(रणभेरी): खुद को चौकीदार बताने वाले और बनारस के एक वरिष्ठ भाजपा नेत्री के पुत्र द्वारा करोड़ो रुपये के सोने की जालसाली का बड़ा मामला सामने आया है। दरअसल वाराणसी के प्रतिष्ठित शोरूम में काम करने वाला राजमंदिर, कोतवाली निवासी संचित अग्रवाल द्वारा शोरूम के फर्जी टोकन बनाकर पांच किलो सोने हड़पने का मामला प्रकाश में आया है। बताया जा रहा है कि टोकन से पूरे देश में उक्त शोरूम से खरीदारी की जा सकती है। जिसका फायदा उठाकर संचित अग्रवाल ने टोकन का बारकोड चेंज कर अपने कई मित्रों की मदद से मध्य प्रदेश और अन्य जगहों से शोरूम से पांच किलों के लगभग सोने की जालसाजी कर ली। मामले का पता तब चला जब शोरूम मालिक के शिकायत पर पांच दिन पूर्व ही क्राइम ब्रांच ने संचित को पकड़कर कड़ी पूछताछ की।

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संचित ने इस पूरे प्रकरण में अपने कई मित्रों के भी नाम लिए जो उसके इस जालसाली में शामिल थे। सूत्रों की माने तो क्राइम ब्रांच की पूछताछ में उसने राजमंदिर के ही निवासी वरिष्ठ भाजपा नेत्री शीला चतुर्वेदी के पुत्र और बीजेपी काशी विश्वनाथ मंडल के उपाध्यक्ष हिमांशु चतुर्वेदी का नाम भी कबूला। भाजपा नेता हिमांशु चतुर्वेदी का नाम जालसाजी में आने के बाद यह बात पूरे शहर में आग की तरह फैल गई। सूत्रों की माने तो हिमांशु के करीबी भाजपा नेता भी मुंह छुपाने लगे हैं। वहीं संचित अग्रवाल भी भाजपा में काफी सक्रिय है। उसने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर नाम के आगे चौकीदार लिखा है इसके अलावा कई भाजपा नेताओं के साथ उसकी तस्वीरें भी हैं। संचित ने अपने दोस्तों सुमित, विकास और मनीष का नाम भी कबूला है। मनीष को पुलिस ने पकड़ा भी था लेकिन सूत्रों की माने तो उसकी मां की गुहार पर पुलिस ने उसे छोड़ दिया और उसे सरकारी गवाह बनाने वाली है।

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गंदे कारनामें में पहले भी आए हैं बनारस के भाजपा नेताओं के नाम:

भारतीय जनता पार्टी की छवि भले ही स्वच्छ बताई जाती हो लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में ही कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं के गंदे कारनामे ने इसे धूमिल ही नहीं बल्कि कालिख पोतने का काम किया है। अभी कुछ दिन पहले ही एक वरिष्ठ भाजपा नेता को चौबेपुर पुलिस ने शराब तस्करी में पकड़ा था और उसके पैरवी भाजपा के प्रदेश स्तर के मंत्रियों ने की थी। वहीं शिवपुर इलाके में रहने वाला एक बीजेपी नेता का नाम खाड़ी देशों में युवतियों की तस्करी में नाम आया था। इसके बाद बीजेपी विश्वनाथ मंडल के उपाध्यक्ष द्वारा करोड़ो रूपये की जालसाली चर्चा का विषय बनी हुई है। सत्ता की छांव में पल बढ़ रहे रसूखदार पैसों की लालच में अब तस्करी के काम में लिप्त हो चुके हैं। सत्ता की हनक के आगे  सब अपने गन्दे कारनामों को अंजाम देने में लगे हैं। इससे निरन्तर पार्टी सहित वरिष्ठ नेताओं की साख गिरने लगी है। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में मौजूदा समय में उनके पार्टी के कुछ  कार्यकर्ता व उनके परिजन और रिश्तेदार गलत कामों को करने पर जोर देकर मोटी रकम वसूल करने में लगे हैं।

पकड़ने और छोड़ने के नाम पर वसूली तो नहीं?

क्राइम ब्रांच की कार्यप्रणाली सन्देह के घेरे में लोगों को प्रतीत हो रही हैं। सोना कांड में उठाये गए कुछ लोगों को क्राइम ब्रांच द्वारा मोटी रकम लेकर छोड़ने का मामला क्राइम ब्रांच की सूत्रों से निकल कर बाहर आ रही हैं। यहीं नहीं पुलिस के इन विशेष सूत्रों ने तो यहां तक बताया कि सोना कांड में पकड़े गए कुछ युवकों के परिजनों को फोनकर क्राइम ब्रांच की तरफ से छोड़ने की एवज में पैसे की मांग की गई। सूत्रों की आगे मानें तो एक युवक के परिजनों की तरफ से रुपये मिलने पर उसे छोड़ दिया गया।